कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म और कहां है जन्म स्थान !

hanuman ji ka janam kaise hua, hanuman ji ka janam, hanuman ji ka janam, hanuman ji ka janam sthan, hanuman ji ka janam katha,

hanuman ji ka janam kaise hua, hanuman ji ka janam, hanuman ji ka janam, hanuman ji ka janam sthan, hanuman ji ka janam katha,

Hanuman ji ka janam kaise hua :

हनुमान जी को बल, विद्या, बुद्धि, शौर्य और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। संकटकाल में हनुमानजी का ही स्मरण किया जाता है जिसके कारण वह संकटमोचन कहलाते हैं। हनुमान जी शिवजी के अवतार थे इसीलिए उनको शिवावतार अथवा रुद्रावतार भी कहा जाता है। रुद्र आँधी-तूफान के अधिष्ठाता देवता भी हैं और देवराज इंद्र के साथी भी। विष्णु पुराण के अनुसार रुद्रों का उद्भव ब्रह्माजी की भृकुटी से हुआ था।

ये भी पढ़े... मंगलवार को करें ये काम, बजरंग बली लगाएंगे बेड़ा पार !

हनुमानजी वायुदेव अथवा मारुति नामक रुद्र और अंजनी माता के पुत्र थे। हनुमान को सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त था। वे भगवान राम के परम भक्त और सेवक भी थे और राजदूत, नीतिज्ञ, विद्वान, रक्षक, वक्ता, गायक, नर्तक, बलवान और बुद्धिमान भी। शास्त्रीय संगीत के तीन आचार्यों में से एक हनुमान भी थे। अन्य दो थे शार्दूल और कहाल। ‘संगीत पारिजात’ हनुमानजी के संगीत-सिद्धांत पर आधारित है।

ये भी पढ़े... घर के मंदिर में कभी भी ना करें ये गलतिया !

आगे पढ़े…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *