कैसे पड़ा साईं बाबा का नाम साईं !

shirdi ke sai baba

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shirdi ke sai baba :

कहते हैं कि शिरडी के साईं बाबा (shirdi ke sai baba) को सबसे पहले नीम के पेड़ के नीचे ध्यानमुद्रा में लीन, सबसे पहले शिरडी के गांव में नाना चोपदार की बूढ़ी मां ने देखा था। वह उस समय सोलह वर्ष के थे और ध्यानमुद्रा में लीन थे। उनके मुख मंडल में अनूठा तेज और शांति थी। उन्हें सबसे पहले साईं नाम भगत म्हालसापति ने दिया था।

उनके व्यक्तित्व में एक चुंबकीय आकर्षण था। इस कारण लोगों की दिन-प्रतिदिन उनके बारे में जानने की इच्छा बढ़ती गई तब एक दिन आश्चर्यजनक घटना घटी। एक भक्त को भगवान खण्डोवा का संचार हुआ और वह बहुत खुश हो गया।

उस समय शिरड़ी में कुछ व्यक्तियों ने उससे पूछा कि हे भद्रजन आप यह बताने की कृपा करें की शिरडी में जो बालक ध्यान में लीन है। ये किस पिता की संतान है और शिरडी में कहां से आए हैं?

तब उस भक्त ने कहा कि भगवान खण्डोवा ने एक मुख्य स्थान पर खोदने का आदेश दिया है। लोगों द्वारा उस स्थान को खोदने पर एक बड़ी शिला के नीचे ईंटों के स्तम्भ दिखाई दिए तब उस बड़ी पत्थर की शिला को हटाया गया तो एक लंबी सी कतार का बरांडा दिखाई पड़ा जिसके अंदर एक गुफा थी जिसके चारों कोने पर दीप जल रहे थे। यह एक कमरा था जो तहखाना था।

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