शनि की आयु पर शुभ दृष्टि हर बला से बचाए

shani dev ki mahima

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shani maharaj ki mahima :

ऐसी स्थिति में हम उन ग्रहों को अनुकूल न बना सके तो क्या, उनका प्रभाव तो कम कर ही सकते हैं। कम करने हेतु उन ग्रहों से संबंधित वस्तुओं को अपने ऊपर से नौ बार नजर उतारने की भाँति उतारकर जमीन में गाड़ दिया जाए तो लाभ होता है। जिस प्रकार रावण ने शनि को औंधे मुँह लिटा रखा था, तब तक रावण को कोई, यहाँ तक कि देवता भी नहीं मिटा पाए।

महाबली बजरंग बली ने रावण के दिमाग को उलटा कहा कि लंकेश तुम्हें यह शोभा नहीं देता कि तुम शनि की पीठ पर लात रखो, तुम उसकी छाती पर लात रखो। रावण ने ऐसा ही किया और जैसे ही रावण पर शनि की कुदृष्टि पड़ी, रावण अपने पूरे कुनबे के साथ मारा गया। शनि अष्टम भाव में मकर या कुंभ, मिथुन, कन्या, राशि में हो तो आयु को बढ़ाता है।

shri shani dev ki mahima :

अकस्मात मृत्यु नहीं देता। गुरु या मीन, मेष या वृश्चिक, सिंह या शनि हो तो मृत्यु तुल्य कर देता है या जान भी जा सकती है। यदि शनि मंगल अष्टम भाव में हो तो निश्चित मृत्यु देगा। लग्नेश के साथ होकर शनि मंगल बैठ जाए तो अल्पायु योग बनेगा। शनि चंद्र मंगल बैठे हों अष्टम में तो जलघात से मृत्यु देगा। शनि मंगल में गुरु हो तो देवालय या तीर्थयात्रा में मृत्यु होगी।

शनि सूर्य-मंगल साथ हो तो आग या विस्फोट में जान जाएगी। शनि मंगल केतु साथ हो तो दुर्घटना में मृत्यु होगी। शनि मंगल-राहू साथ हों तो विचित्र परिस्थितियों में मृत्यु का कारण बनती है। शनि की उच्च दृष्टि कहीं से भी पड़े तो आयु वृद्धि करता है। शनि की मित्र दृष्टि पड़े तो आयु में वृद्धि होगी। कोई भी ग्रह अष्टम भाव में स्वराशि का हो तो आयु में वृद्धि होगी।

गुरु चंद्र साथ हो तो तीर्थाटन पर कोई नदी हो तो संभलकर स्नान करें। आमेश पर कोई अशुभ प्रभाव न हो, न ही द्वितीयेश या सप्तमेश में से दोनों में से एक ही दशा में अंतर दशा इन्हीं दोनों में से किसी एक की ही व अष्टमेश का अंतर हो तो वह समय सबसे खतरनाक होगा। यदि सूक्ष्म अंतर द्वितीयेश का हो या सप्तमेश का, तो मृत्यु संभव है।

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