शनि देव की महिमा – कहावत है शनि जाते हुए अच्छे लगते हैं न कि आते हुए

shani mahima

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शनि से प्रभावित (shani dev effact)व्यक्ति कई प्रकार के अनावश्यक परेशानियों से घिरे हुए रहते हैं। कार्य में बाधाओं का होना, कोई भी कार्य आसानी से न बनना जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को कम करने हेतु शनिचरी जयंती के दिन शनि से संबंधित वस्तुओं का दान करना उत्तम रहता है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में शनि का कुप्रभाव हो उन्हें

शनि के पैरों की तरफ ही देखना चाहिए, जहां तक हो सके शनि प्रभु की द्रष्टि दर्शन से बचना चाहिए। शनि से घबराने की आवश्यकता नहीं है बल्कि शनि को अनुकूल कर कार्य सिद्ध करने के लिए विधिपूर्वक मंत्र जाप एवं अनुष्ठान जरूरी होते हैं।

वस्तुतः पूर्व कृत कर्मों का फल यदि आराधना के द्वारा शांत किया जा सकता है, तो इसके लिए साधकों को पूरी तन्मयता से साधना और आराधना करनी चाहिए। इस दिन शनि मंदिरों एवं हनुमान के मंदिरों में शनि जयन्ती को पूरी निष्ठा के साथ विशेष अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।नवग्रहों में शनिदेव का स्थान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है ।

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