शनि ग्रह हैं या देवता

shani planet or god

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण:- खगोल विज्ञान के अनुसार शनि का व्यास 120500 किमी, 10 किमी प्रति सेकंड की औसत गति से यह सूर्य से औसतन डेढ़ अरब किमी. की दूरी पर रहकर यह ग्रह 29 वर्षों में सूर्य का चक्कर पूरा करता है। गुरु शक्ति पृथ्‍वी से 95 गुना अधिक और आकार में बृहस्पती के बाद इसी का नंबर आता है। अपनी धूरी पर घूमने में यह ग्रह नौ घंटे लगाता है। ज्योतिष अनुसार शनिग्रह:- नौ ग्रहों में शनि बृहस्पति के बाद सबसे बड़ा ग्रह है। शनिग्रह एक राशि में ढाई वर्ष भ्रमण करता है। शनि सभी द्वादश (बारह) राशि घूमने के लिए तीस साल का समय लेता है। तीन राशियों की कालावधि को साढे सात वर्ष लगते हैं इसीलिए इस काल को साढेसाती कहते हैं। जब शनि जन्म राशि के बारहवें (जन्मराशि में से द्वितीया में भ्रमण करता है) तब प्रस्तुत परिपूर्ण काल साढ़ेसाती का माना जाता है।

शनिग्रह का असर ज्योतिष अनुसार : लाल किताब के विशेषज्ञों अनुसार शनिग्रह एक ऐसा ग्रह है जिसका धरती के सभी तरह के लौहतत्व पर असर देखने को मिलता है। हमारे शरीर में भी लौह तत्व होता है। इसके अलावा दृष्टि, बाल, नक्ष, भवें और कनपटी पर भी शनि का असर रहता है।

जिस तरह चंद्रमा का असर धरती के जलतत्व पर पड़ता है उसी तरह शनि का असर लौहे, तेल और प्राकृतिक रूप से उत्पन्न सभी काली और नीले रंग की वस्तुओं पर पड़ता है। उनमें भैंस, भैंसा, कीकर, आक, खजूर, काले जूते, जुराब आदि की गणना की जाती है। शनि का यह असर अच्‍छा भी होता है और बुरा भी। जिस व्यक्ति या स्थान की जैसी प्रकृति होती है उस पर वैसा असर होता है।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिग्रह यदि कहीं रोहिणी-शकट भेदन कर दे तो पृथ्वी पर बारह वर्ष घोर दुर्भिक्ष पड़ जाता है और प्राणियों का बचना ही कठिन हो जाता है। यह योग महाराजा दशरथ के समय में आया था। इस योग के प्रभाव से राज्य की प्रजा बेहाल हो गई थी। भयंकर सूखा था।
यदि किसी व्यक्ति पर इसका बुरा असर हो रहा है, तो लाल किताब के अनुसार भगवान भैरव की शरण में जाना जाहिए या अपने खानपान और व्यवहार में बदलाव करके कुछ उपाय करना चाहिए।

अशुभ की निशानी : शनि के अशुभ प्रभाव के कारण मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता है या क्षति ग्रस्त हो जाता है, नहीं तो कर्ज या लड़ाई-झगड़े के कारण मकान बिक जाता है। अंगों के बाल तेजी से झड़ जाते हैं। अचानक आग लग सकती है। धन, संपत्ति का किसी भी तरह नाश होता है। समय पूर्व दाँत और आँख की कमजोरी।

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शुभ की निशानी : शनि की स्थिति यदि शुभ है तो व्यक्ति हर क्षेत्र में प्रगति करता है। उसके जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता। बाल और नाखून मजबूत होते हैं। ऐसा व्यक्ति न्यायप्रिय होता है और समाज में मान-सम्मान खूब रहता हैं। उपाय : सर्वप्रथम भगवान भैरव की उपासना करें। तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, काली गौ, और जूता दान देना चाहिए। कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलावे। छायादान करें, अर्थात कटोरी में थोड़ा-सा सरसो का तेल लेकर अपना चेहरा देखकर शनि मंदिर में अपने पापो की क्षमा मांगते हुए रख आएं। दांत साफ रखें। अंधे-अपंगों, सेवकों और सफाईकर्मियों से अच्छा व्यवहार रखें।

सावधानी : कुंडली के प्रथम भाव यानी लग्न में हो तो भिखारी को ताँबा या ताँबे का सिक्का कभी दान न करें अन्यथा पुत्र को कष्ट होगा। यदि आयु भाव में स्थित हो तो धर्मशाला का निर्माण न कराएं। अष्टम भाव में हो तो मकान न बनाएं, न खरीदें। उपरोक्त उपाय भी लाल किताब के जानकार व्यक्ति से पूछकर ही करें।

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