जब साईं बाबा ने दी हिन्दू और मुस्लिम को एक अनोखी मिशाल !

sai baba religion

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एक गांव में गोपालराव नामक एक इंस्पेक्टर थे। वे सुबह-सुबह अपने दरवाजे के पास खड़े थे कि तभी गांव का एक मेहतर अपनी पत्नी के साथ वहां से गुजरा। जैसे ही उन दोनों की दृष्टि गोपालराय पर पड़ी, मेहतरानी अपने पति से बोली कि सुबह-सुबह किस निपूते का मुंह देख लिया। अब पता नहीं हम जहां जा रहे हैं वहां पहुंच पाएंगे या नहीं? आज रहने, दो कल चलेंगे।

इंस्पेक्टर गोपालराव के दिल में मेहतरानी की बात तीर की तरह चुभ गई। इंस्पेक्टर ने संतान की इच्छा से 4 विवाह किए थे लेकिन एक से भी उनको कोई पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई थी। उन्होंने डॉक्टर, नीम-हकीम, वैद्य आदि सभी से इलाज कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस घटना ने इंस्पेक्टर गोपालराव को भीतर से बुरी तरह तोड़ दिया था।




इस घटना के बाद संतान न हो तो जीवन व्यर्थ ही है, यह सोचकर उन्होंने निश्चय कर लिया कि नौकरी छोड़ देंगे और सभी धन-संपत्ति को चारों पत्नियों के बीच बांटकर वे संन्यास ले लेंगे। यह निश्चय करने के बाद उन्होंने त्यागपत्र लिखा और कुर्सी पर बैठे-बैठे ही गहरे विचार में डूब गए। तभी दरवाजे के बाहर गाड़ी रुकने की आवाज सुनाई दी।

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