सूर्य-शनि की दृष्टि बढ़ाए वैचारिक मतभेद

surya putra shani dev

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surya putra shani dev :

सूर्य आत्मा का कारक होकर अग्नि तत्व प्रधान है। सूर्य अत्यधिक प्रभावशाली तेजस्वी गृह है। शनि मंद गति से भ्रमण करने वाला होता है। सूर्य पिता है तो शनि पुत्र है। सूर्य शनि साथ होने पर पिता पुत्र (surya putra shani dev)से डरता है। इससे शनि का प्रभाव नहीं पड़ता। पुत्र पिता से अलग रहता है, तो निश्चित ही आपसी मतभेद भी करा देता है। इसके फलस्वरूप पिता से नहीं बनती या पिता का साथ नहीं मिल पाता है।

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ठीक उसी प्रकार सूर्य शनि समसप्तक हो तो पिता पुत्र में सदैव वैचारिक मतभेद बना रहना स्वाभाविक है। सूर्य शनि का अलग-अलग समसप्तक बनने से मतभेदों में अलग-अलग अंतर होगा। हमने ऐसी हजारों कुंडलियों का निचोड़ 22 वर्षों में जाना है। सूर्य शनि का समसप्तक योग लग्न सप्तम योग कुटुम्ब से वैचारिक मतभेद का कारण बनता है। स्वास्थ्य में भी गड़बड़ रहती है। वाणी में संयम न रख पाने की वजह से कई बनते कार्य बिगड़ सकते हैं। धन का संग्रह भी नहीं हो पाता है।

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