क्या लंका का दहन हनुमान ने नहीं पार्वती ने किया था- एक अनोखा रहस्य !

lanka dahan story :

hanuman bhajan

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पहली कथा

हनुमान की माता अंजना एक राजकुमारी थी. खूबसूरत होने के साथ साथ वो बहुत नटखट भी थी. एक बार वन में विचरण करते हुए उन्होंने ध्यान मग्न ऋषि को देखा.

ऋषि की शक्ल वानर जैसी थी, ऐसी शक्ल देखकर अंजना ज़ोर जोर से हंसने लगी. उनकी हंसी से ऋषि का ध्यान भंग हो गया. अपने रूप पर घमंड और ऋषि की शक्ल का मजाक उड़ाने का पता चलने पर ऋषि अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने अंजना को श्राप दिया कि वो एक वानर कन्या में बदल जाए.

श्राप के असर से अंजना वानर कन्या बन गयी और उसका घमंड चूर हो गया. अंजना ने ऋषि से क्षमा मांगी तो द्रवित हो ऋषि ने कहा कि यदि भगवन शिव पुत्र रूप में अंजना के जन्म लें तो उसे इस श्राप से मुक्ति मिल जायेगी.

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यह सुनकर अंजना न्हाग्वान शिव की अनन्य आराधना में लग गयी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् शिव ने वरदान दिया कि वो अंजना के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे.

जब पार्वती को इस बात का पता चला तो उन्होंने शिव से कहा कि क्या वो भी धरती पर अवतरित हो सकती है?

भगवान् शिव ने कहा कि वो अंजना के बल ब्रह्मचारी हनुमान के रूप में जन्म लेंगे इसलिए पार्वती के साथ नहीं रह सकेंगे.

भगवान शिव की ये बात सुनकर पार्वती ने कहा कि वो वानर रुपी शिव की पूँछ के रूप में अवतार लेंगी जिससे हनुमान में शिव और शक्ति दोनों का अंश होगा और वो अत्यंत बलशाली होंगे.

इस प्रकार माता अंजना के भगवान् शिव ने वानर रूप में जन्म लिया और उनको श्राप से मुक्ति दिलाई. हनुमान की पूँछ के रूप में पार्वती थी.

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