महामृत्युंजय के 12 सिद्ध प्रयोग जो दिलायंगे साक्षात महाकाल का आशीर्वाद !

महाकाल मंत्र – महामृत्युंजय मंत्र – mahakal mantra – maha mrityunjay mantra

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 महाकाल मंत्र – महामृत्युंजय मंत्र – mahakal maha mrityunjay mantra:

महामृत्युंजय तंत्र ( mahakal mahamrityunjay  ) के इन प्रयोगों के द्वारा महादेव शिव शीघ्र प्रसन्न होते है तथा उनके आशीर्वाद स्वरूप अकाल मृत्यु से मुक्ति प्राप्त होती है, रोग्य (पूर्ण स्वस्थ शरीर) की प्राप्ति, ग्रह-नक्षत्र दोष, नाड़ी दोष, मांगलीक दोष, शत्रु षडाष्टक दोष, विधुरदोष, वैधव्य दोष, अधिक कष्ट देने वाले असाध्य रोग और मृत्यु तुल्य मानसिक और शारिरिक कष्टों का निवारण होता है.

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और प्रारब्धकर्म, संचित कर्म अौर वर्तमान कर्मो का नाश होता है. आज हम महमृत्युंज्य तंत्र के उन 12 सिद्ध मंत्रो को जानेंगे जिनका प्रयोग बहुत ही सरल है तथा इन मंत्रो दवारा अति शीघ्र फल की प्राप्ति होती है.

1 सूर्य ग्रह शान्ति, सुख समृद्धि तथा ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए :-

रविवार को एक ताम्बे के पात्र में जल लेकर उसमे गुड और लाल चंदन मिलाकर उस जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करें तथा महामृत्युंजय मन्त्र ( mahakal mahamrityunjay) का जाप करें. इस प्रयोग से आपके घर में सुख समृद्धि आएगी, ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, लक्ष्मी का वास होगा तथा सूर्य ग्रह शांत होंगे.

2 मनोकामना पूर्ति के लिए :-

महादेव शिव को शिव रात्रि के दिन 108 नीबुओं की माला बनाकर पहनाए तथा अमावश्या के दिन उस नीबुओं की माला को उतारकर नीबुओं को अलग-अलग कर दे. महामृत्युंजय के मन्त्र के साथ नीबुओं का हवन करने से को एक मनोकामना की पूर्ति होती है.

3 अचानक आये संकट के नाश के लिए :-

mahakal mahamrityunjay का जाप के साथ जायफल की आहुति देने से सभी रोगों का नाश होता है और अचानक आई हुई विपदा का निवारण होता है.

4 सभी रोगों के नाश और उत्तम स्वास्थ प्राप्ति के लिए :-

यदि कोई व्यक्ति भयंकर रोग से ग्रसित हो तो उसे इस रोग से मुक्ति दिलाने के लिए महामृत्युंजय मन्त्र का जाप करते हुए भगवान शिव के पारद शिवलिंग ( shivlingam ) का प्रतिदिन सवा घंटे तक जलाभिषेक करना चाहिए तथा उसके बाद अभिषेक किये हुए जल का थोड़ा सा पानी हर रोज रोगी को पिलाना चाहिए. इस प्रयोग से रोगी का बहुत ही पुराना रोग या मृत्यु के समान कष्ट देने वाला रोग भी समाप्त हो जाता है.

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5 स्वास्थ लाभ के लिए :-

सर्व प्रथम आप तांत्रिक mahakal mahamrityunjay के 1,37,500 मंत्र जाप का अनुष्ठान करके मंत्र सिद्धि प्राप्त करें तत्पश्चात जब कभी कोई , नजर दोष से पीडित बच्चे , टोने टोटकों से या तांत्रिक क्रिया से परेशान कोई व्यक्ति आए तो उसे मोर पंख से झाड़ा (झाड़नी) देने से समस्त समस्याओं का समाधान हो जाएगा.

6 धन लाभ की प्राप्ति, व्यापार में लाभ, उत्तम विद्या की प्राप्ति तथा तीव्र बुद्धि की प्राप्ति के लिए :-

प्रत्येक बुधवार को कांसे का पात्र लेकर उसमे जल के साथ दही, शक्कर तथा घी मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से असीम धन के प्राप्ति होती है, व्यापार में लाभ होता है , उत्तम विद्या की प्राप्ति होती है व बुद्धि तीव्र होती है.

7 पुत्र प्राप्ति, सभी प्रकार के सुखो की प्राप्ति के लिए :-

प्रति मंगलवार को ताँबे के पात्र में जल में गुड मिलाकर लाल फुल डालकर मृत्युञ्जय मंत्र जाप करते हुए शिव लिंग पर चढ़ानें से सभी प्रकार के सुखो की प्राप्ति,पुत्र की प्राप्ति और स्वास्थ्य लाभ व शत्रुओं का नाश तथा मंगल ग्रह की शांति होती है.

8 विवाह, संतान तथा भौतिक सुख शांति प्राप्ति के लिए :-

प्रत्येक शुक्रवार को चांदी या स्टील के बर्तन में जल, दूध, दही, घी, मिश्री व शक़्कर आदि मिलाकर mahakal mahamrityunjay का जाप करते शिव को अर्पित करने से तुरंत विवाह का योग बनता है, संतान की प्राप्ति होती है तथा भौतिक सुख प्राप्त होता है.

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9 उत्तम विद्या, धनधान्य और पुत्र पौत्र सुख और मनोंकामना की पुर्ति के लिए :-

प्रति गुरू वार को काँसे या पीतल के पात्र में जल में हल्दी मिला कर मृत्युञ्जय मंत्र जाप करते हुए शिवलिंग पर चढ़ानें से उत्तम विद्या की प्राप्ति, धनधान्य तथा पुत्र पौत्र आदि की प्राप्ति अौर बृहस्पति (गुरू) ग्रह की शांति होती हैं.

10 रोगी के स्वास्थ्य लाभ के लिए :-

शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग के पास आसन लगाकर कर बैठे तथा अपने समीप जल से भरा एक ताम्बे का पात्र रखे. तथा पांच माला महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. प्रत्येक माला के जाप के बाद उस जल से भरे ताम्बे के कलश में फुक मारते जाए इस तरह पांच बार माला जाप के साथ उस जल से भरे ताम्बे के पात्र में पांच बार फुक मारे इसके बाद उस जल को रोगी को पिलाए. यह अचूक उपाय है तथा इस के द्वारा रोगी के स्वास्थ में आश्चर्यजनक लाभ होगा.

11 मानसिक कष्ट, शत्रु भय,आर्थिक संकट निवारण और धनधान्य, व्यापार की वृद्धि राज्य प्राप्ति के लिए:

शनिवार को बादाम तेल और जैतुन तेल मे गुलाब और चंदन इत्र मिलाकर एक करके चोमुखी(चार बत्ती वाला) दीपक शिव मन्दिर मे जलाकर लोहे या स्टील के पात्र में सरसो के तेल भरकर मृत्युञ्जय मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर चढ़ानें से मानसिक कष्ट का निवारण होता है, शत्रुओं का नाश होता हैं, व्यापार मे उन्नति या नौकरी में उन्नति होती है, धनधान्य की वृद्वि होती है, अपने कार्य क्षेत्र में राज्य की प्राप्ति होती है .

12 मानसिक शांति और मनों कामना की पूर्ति के लिए :

प्रति सोमवार को चाँदी अथवा स्टील के पात्र में जल में दूध, सफेद तिल्ली और शक्कर मिलाकर मृत्युञ्जय मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर चढ़ानें से मानसिक शांति और मनोंकामना की पूर्ति तथा चन्द्र ग्रह की शांति होती हैं.

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