आखिर रावण का वध करने के बाद भी श्री राम क्यों नहीं गए लंका सीता को लेने !

hidden story of ramayan

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बात उस समय की है जब प्रभु श्री राम एवं लंकापति रावण का युद्ध आखिरी चरण में आ चुका था. भगवान श्री राम ने रावण पर अनेक बाण चलाए परन्तु रावण हर बार अपनी मायावी शक्तियों के छल से बच निकलता तब श्री राम ने अपने दिव्यास्त्रों का प्रयोग रावण के वध के लिए किया.

जब राम के एक दिव्य तीर ने जाकर रावण का सर धड़ से अलग किया तभी रावण के मायावी शक्तियों से रावण का एक नया सर उग गया. इस तरह राम उस पर तीर चलाते गए और रावण अपने माया से एक और नया सर उतपन्न कर लेता.

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जब राम रावण की माया को देख निराश हो गए तब विभीषण ने भगवान राम को रावण के मृत्यु का भेद बताया.

तब भगवान राम ने एक साथ 36 बाण रावण पर छोड़े. पहला बाण लगा रावण की नाभि में जाकर जिससे उसमे समाहित अमृत बाहर निकल गया. बाकि के तीस बाण में से बीस हाथो को और दस सरो को काट के मंदोदरी के सामने गिरा के वापस राम के तरकश में आ गए थे.

मंदोदरी ये देख मूर्छित हो गई, रणभूमि में जैसे ही रावण का शरीर जिसमे उसका असली सर था धड़ाम से गिरा तो समस्त पृथ्वी काँप उठी. जैसे ही राम ने रावण का वध किया सभी देवता स्वर्ग से भगवान राम पर पुष्पों की वर्षा करने लगे.

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