जाने महादेव शिव की विश्व में सबसे बड़ी 9 मूर्तियों के बारे में !

शिव को देवों के देव कहते हैं, इन्हें महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है. तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है. हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं. वेद में इनका नाम रुद्र है. यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं. भगवान शिव की अर्धांग्नी (शक्ति) का नाम पार्वती है.

इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं. शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है. शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं. कैलाश में उनका वास है.

भगवान शिव ने ही सर्वप्रथम ध्यान की खोज करी तथा इस ज्ञान का पूर्ण रूप से विकास किया. इस बात का उल्लेख हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रन्थ श्री रामचरित मानस में उल्ल्खित किया जिसमे लिखा .
संकर सहज सरूपु सम्हारा. लागि समाधि अखंड अपारा .

आइये जानते है महादेव शिव शम्भु की पुरे विश्व में स्थापित कुछ सबसे बड़ी मूर्तियों के बारे में.

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कैलाश नाथ महादेव, सांगा, जिला भक्तापुर ( नेपाल )
उचाई 45 मीटर, लगभग 143 फुट

महादेव शिव की सबसे बड़ी मूर्ति हमारे पड़ोसी देश नेपाल के चित्तपोल सांगा जिला भक्तापुर में स्थित है. भगवान शिव की यह विशाल प्रतिमा खड़ी अवस्था में है जिसका निर्माण 2004 में आरम्भ हुआ था और 2010 में यह मूर्ति बनकर तैयार हुई थी व इसका अनावरण 21 जून 2011 में हुआ था.

भगवान शिव की इस प्रतिमा में 11 करोड़ की लागत आई थी तथा इसका निर्माण धनराज जैन परिवार ने किया था. इस मुर्ति को बनने वाले 2 मूर्तिकार थे जिनका नाम मनुराम वर्मा तथा नरेश कुमार वर्मा था. भगवान शिव की इस विशाल प्रतिमा को देखना बहुत अद्भुत है.

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शिव मूर्ति मुरुदेश्वरा, कर्नाटका ( भारत )
उचाई 37 मीटर, लगभग 123 फुट

भगवान शिव के दूसरे नंबर की सबसे बड़ी मूर्ति अरब सागर के तट पर स्थित है. यहाँ भगवान शिव बैठक मुद्रा में स्थापित है, भगवान शिव की यह प्रतिमा जिस जगह पर स्थापित है उस पुरे क्षेत्र को मुरुदेशवरा के नाम से जाना जाता है. मुरुदेश्वर दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल तहसील में अरब सागर के तट पर स्थित एक कस्बा है. कंदुका पहाड़ी पर तीन ओर से पानी से घिरा यह मुरुदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यहां भगवान शिव का आत्मलिंग स्थापित है जिसका संबंध रामायण काल से है.

मान्यता के अनुसार अमरता पाने हेतु रावण जब शिवजी को प्रसन्न करके उनका आत्मलिंग अपने साथ लंका ले जा रहा था तब रास्ते में इस स्थान पर आत्मलिंग को धरती पर रख दिए जाने के कारण स्थापित हो गया था.

Giant statue of Lord Shiva at Grand Bassin

मंगल महादेव ( मोरिशिस )
उचाई 33 मीटर, लगभग 108 फुट

शिव की यह अनोखी प्रतिमा मॉरीशस के गंगा झील के पास खड़ी मुद्रा में स्थापित की गई है. लगभग इतनी ही ऊंची मूर्ति भारत के उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद में गंगा के तट पर स्थित है. इलाहाबाद की यह मूर्ति बैठक मुद्रा में है. इसके अलावा इतनी ही ऊंचाई लिए एक और मूर्ति भारतीय राज्य सिक्किम के गंगटोक जिला मुख्यालय से 92 किलोमीटर की दूरी पर नामची क्षेत्र में स्थित है जिसे सिद्धेश्वर धाम और किरातेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है.

गंगा तालाब या झील को ग्रांड बेसिन भी कहा जाता है. यह मॉरीशस के मध्य में सावने जिले के दूरस्थ पर्वतीय इलाके में झीलनुमा गड्ढे के रूप में स्थित है. यह समुद्र तल से 1,800 फुट ऊपर है. गंगा तालाब जाने वाला तीर्थयात्रियों का पहला समूह त्रिओलेत गांव से था और इसका नेतृत्व 1898 में टेरे राउज के पंडित गिरि गोसाईं ने किया था.

इसे मॉरीशस का सर्वाधिक पवित्र स्थल माना जाता है और भगवान शिव का मंदिर झील के किनारे स्थित है. शिवरात्रि पर मॉरीशस में बहुत से श्रद्धालु अपने घरों से नंगे पैरों से पैदल चलकर झील तक पहुंचते हैं.

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हर की पौड़ी, हरिद्वार ( उत्तराखंड, भारत )
उचाई 30 मीटर, लगभग 108 फुट

बताया जाता है कि बाढ़ के कारण ऋषिकेश की मूर्ति पानी में बह गई. हर की पौड़ी भारत के सबसे पवित्र घाटों में एक है. कहा जाता है कि यह घाट विक्रमादित्य ने अपने भाई भतृहरि की याद में बनवाया था. यहीं पर हर शाम हजारों दीपकों के साथ गंगा की आरती की जाती है. हर की पौड़ी के पीछे के बलवा पर्वत की चोटी पर मनसादेवी का मंदिर बना है. मंदिर तक जाने के लिए पैदल रास्ता है. मंदिर जाने के लिए रोप-वे भी है.

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शिवगिरि महादेव, बीजापुर, शिवपुर ( कर्नाटक )
उचाई 26 मीटर, लगभग 85 फुट

शिवगिरि महादेव की यह विशालकाय मूर्ति लगभग 85 फुट ऊंची है, जो बीजापुर जिले के शिवपुर स्थान पर सन् 2006 में स्थापित की गई थी. शिव की यह बैठी हुई प्रतिमा 2011 में स्थापित की गई है.

नागेश्वर महादेव, दारुकवन ( गुजरात )
उचाई 25 मीटर , करीब 82 फुट

12 ज्योतिर्लिंगों में से गुजरात में 2 ज्योतिर्लिंग हैं- एक सोमनाथ महादेव और दूसरे नागेश्‍वर महादेव. यह मंदिर पहले बहुत छोटा था लेकिन बाद में इस मंदिर को भव्य रूप दिया टी सीरिज के निर्माता गुलशन कुमार ने.

मंदिर प्रांगण के बाहर भगवान शिव की विशालकाय मूर्ति भूतल से 82 फुट ऊंची और चौड़ाई में 25 फुट चौड़ी है. इतनी ही ऊंचाई लिए एक मूर्ति मध्यप्रदेश के ओंकारेश्‍वर में भी स्थापित है. ओंकारेश्वर में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 1 लिंग है, यहीं पर ममलेश्‍वर महादेव का मंदिर भी है.

कचनार महादेव, जबलपुर ( मध्यप्रदेश )
उचाई 76 फुट

मध्‍यप्रदेश के जबलपुर जिले के कचनार शहर में शिव मंदिर के पास स्थापित इस मूर्ति की ऊंचाई 76 फुट है. यहीं पर 12 ही ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां बनाई गई हैं. जबलपुर भेड़ाघाट वॉटर फाल, 64 योगिनी मंदिर और कान्हा नेशनल पार्क के लिए प्रसिद्ध है.

केम्प फोर्ट शिव मूर्ति, बेंगलूर ( कर्नाटक )
65 फुट

65 फुट ऊंची इस मूर्ति की स्थापना 1995 में हुई थी. इस मूर्ति में भगवान शिव पद्मासन की अवस्था में विराजमान हैं. इस मूर्ति की पृष्ठभूमि में कैलाश पर्वत, भगवान शिव का निवास स्थल तथा प्रवाहित हो रही गंगा नदी है.

बेलिश्र्वर महादेव, भंजनगर, जिला गंजम ( ओडिशा )
उचाई 61 फुट

भारतीय राज्य ओडिशा के भंजनगर में स्थित चंद्रशेखर महादेव मंदिर के पास ‍स्थापित इस मूर्ति की ऊंचाई लगभग 61 फुट है. 6 मार्च 2013 को इस मूर्ति का अनावरण किया गया था.

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