शिर्डी के साईं बाबा के जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, एक अनोखा फकीर !

हिंदुस्तान की जमीन पर अनेक महान विभूतियों ने समय-समय पर जन्म लिया है. इन्हीं में एक शिरडी वाले साईं बाबा एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु थे. साईं भक्त हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के थे जबकि साईं हिन्दू थे या मुसलमान, ये अभी भी रहस्य है.

साईं बाबा ने जाति-पांति से ऊपर उठकर एक विशुद्ध संत की तस्वीर प्रस्तुत की थी. साईं बाबा के चमत्कारों की वजह से दूर-दूर से लोग मिलने आते थे और धीरे-धीरे वो एक प्रसिद्ध संत कहलाने लगे.

साईं बाबा को आज पूरे विश्व में पूजा जाता है साईं बाबा का जन्म 28 सितम्बर, 1835 को महाराष्ट्र के पथरी गांव में हुआ था. साईं बाबा के माता-पिता और बचपन की इतिहास में कोई जानकारी नहीं है. उनके बारे में पहली जानकारी “साईं सत् चरित्र” किताब में शिरडी गांव से प्राप्त होती है.

साईं बाबा 16 वर्ष की उम्र में अहमदनगर जिले के शिरडी गांव में पहुंचे. यहां पर उन्होंने एक नीम के पेड़ के नीचे आसन में बैठकर तपस्वी जीवन बिताना शुरू कर दिया.जब गांव वालों ने उन्हें देखा तो वो चौंक गए क्योंकि इतने युवा व्यक्ति को इतनी कठोर तपस्या करते हुए उन्होंने पहले कभी नहीं देखा.

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