जाने कैसे पता चला पांडवो को कुंती के बताने से पहले ज्येष्ठा भ्राता होने का राज!

कुरुक्षेत्र में लड़े गए महाभारत के विनाशकारी युद्ध को संसार का प्रथम विश्वयुद्ध कहा गया है. उसी समय में सहस्त्रबाहु – परशुराम तथा राम रावण का युद्ध हुआ था, परन्तु फिर भी महाभारत का युद्ध प्रलयंकारी एवं भीषण माना जाता है क्योकि इस युद्ध में परमाणु अस्त्र एवं शस्त्रों को भी प्रयोग में लाया गया था.

महाभारत युद्ध के विषय में यह भी कहा जाता है की इस युद्ध के कारण उस समय की विकसित सम्पूर्ण हड़प्पा सभ्यता का विनाश हो गया था. 18 दिन तक चलने वाले महाभारत के इस युद्ध में 18 अक्षौहिणी सेना शामिल हुई थी.

एक अक्षौहिणी सेना में एक लाख नो हजार तीन सौ पचास सैनिक 65610 घुड़सवार, 21870 रथ, तथा 11870 हाथी होते थे. इस युद्ध के समाप्ति के पश्चात सम्पूर्ण मानव जाती के भीतर हिंसा के प्रति विपरीत प्रभाव पड़ा था सब लोक हिंसा की जगह अब अहिंसा को स्थान देने लगे थे. तथा समय के चक्र के साथ सम्पूर्ण भारत अहिंसा के मार्ग पर निकल पड़ा था.

परन्तु जैसे जैसे समय व्यतीत हुआ तथा फिर समय का चक्र घुमा मनुष्य पुनः हिंसा को अपनाने लगे.

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