जाने आखिर कैसे प्राप्त हुई थी शिव को तीसरी आँख ?

पुराणों में भगवान शिव एक ऐसे देवता के रूप में उल्लेखित है जिनकी आराधना देवता, दानव और मानव सभी करते है . भगवान शिव की जो छवि पेश की जाती है उसमे एक और तो वे दाम्पत्य जीवन जीते है वही दूसरी और कैलाश पर्वत पर तपस्यारत कैलाश की तरह ही निश्छल योगी की . भगवान शिव के चरित्र की सबसे विचित्र बात यह है उनकी तीसरी आँख होना.

आखिर भगवान शिव के माथे पर तीसरे आँख होने का क्या निहतार्थ है ? वस्त्विक्ता में भगवान शिव की तीसरी आँख उनका कोई अलग सा अंग नहीं है यह प्रतीक है उस दृष्टि को जो आत्मज्ञान के लिए आवश्यक है. भगवान शिव जैसे योगी के पास तीसरी आँखे होना कोई अचरज की बात नहीं है.

आखिर क्यों है भगवान शिव के पास तीसरी आँख ?

व्यक्ति को संसार को देखने के लिए सिर्फ दो आँखे ही पर्याप्त है परन्तु संसार एवं संसारिक से परे देखने के लिए आवश्यक है तीसरी आँख का होना जो केवल भगवान शिव जैसे योगी के पास ही हो सकती है.

अर्थात तीसरी आँख बाहर नहीं भीतर देखने के लिए होती है. अर्थ तीसरी आँख प्रतीक है बुद्धिमता, ज्ञान एवं विवेकशीलता का.

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