हनुमान जी ने दिए थे भीम को अपने शरीर के तीन बाल पर क्यों ? जाने तीन बालों का रहस्य..

pandit (1)

पांडवो ने महाभारत के युद्ध में कौरवों पर विजयी प्राप्त कर ली थी तथा हस्तिनापुर का राजा पांडवो में ज्येष्ठ युधिष्ठर को बनाया गया था. सभी प्रजा राजा युधिस्ठर के राज में खुस थी तथा उन्हें किसी भी चीज की कमी नहीं थी.

एक दिन देवऋषि नारद मुनि महाराज युधिस्ठर के सामने प्रकट हुए तथा उन्होंने युधिस्ठर को यह बात कहि की स्वर्गलोक में आपके पिता बहुत दुखी है . जब युधिस्ठर ने देवऋषि से इसका कारण पूछा तो वह बोले पाण्डु अपने जीते जी राजसूय यज्ञ कराना चाहते थे जो वे न कर सके इसी बात को लेकर वे दुखी रहते है. महाराज युधिस्ठर ! आपको आपके पिता के आत्मा के शांति के लिए यह यज्ञ करवाना चाहिए.

ये भी पढ़े... मंगलवार को करें ये काम, बजरंग बली लगाएंगे बेड़ा पार !

तब नारद ऋषि के परामर्श पर तथा अपने पिता के आत्मा की शांति के लिए युधिस्ठर ने राजसूय यज्ञ करवाया , तथा इसकी भव्यता के लिए उन्होंने भगवान शिव के परम भक्त ऋषि पुरुष मृगा को आमंत्रित करने का फैसला लिया. ऋषि पुरुष मृगा जैसा की उनका नाम था वे अपने नाम के समान ही जन्म से आधे पुरष शरीर के थे तथा निचे से उनका पैर मृग का था.

युधिस्ठर ने उन्हें यज्ञ में निमंत्रण देने के लिए भीम को उनके पास भेजा. भ्राता युधिस्ठर के आदेशानुसार भीम ऋषि मृगा को ढूढ़ने वन में निकल पड़े. वन में ही मध्य मार्ग पर उन्हें हनुमान जी दिखाई दिए तथा हनुमान जी ने भीम का घमंड चूर किया.

दोनों ही पवन पुत्र थे तथा इस लिहाज से दोनों एक दूसरे के भाई थे. जब भीम हनुमान से भेट करने के पश्चात अपने मुख्य कार्य के लिए आगे बढ़ने वाले हनुमान जी उन्हें रोकर अपने शरीर के तीन बाल पकड़ाए. तथा कहा की भीम इन तीन बालों को तुम अपने पास रखो संकट के समय ये तुम्हारे काम आएंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *