प्राचीन समय में मनुष्य था अलौकिक शक्तियों का स्वामी परन्तु देवताओ ने छीना लिए उन्हें, आखिर क्यों ?

प्राचीन समय में एक साधारण मनुष्य में भी देवताओ के समान कुछ ऐसी अलौकिक शक्तियां थी जिस के प्रयोग से वह अपनी इच्छाएं पूरी कर सकते थे. परन्तु देवताओ द्वारा इन अलोकिक शक्तियों को ऐसी जगह छुपा दिया जिसे कोई अब साधारण मनुष्य आसानी से प्राप्त नहीं कर सकता.

आइये आज हम इस प्राचीन कथा के बारे में बताने जा रहे है जो काफी रोचक कथा है.

एक बार देवताओ के मध्य यह चर्चा हो रही थी, की मनुष्य अपनी शक्तियों का प्रयोग कर प्रमादी एवं आलसी हो रहे है तथा उन्होंने कर्म करना छोड़ दिया है. इंद्र बोले की हमें मनुष्यो को वापस कर्म की और मोड़ने के लिए शीघ्र ही कुछ करना होगा.

तभी एक देवता सुझाव देते हुए बोले की क्यों न हम मनुष्य की इन शक्तियों को छुपा दे, इस सुझाव पर सभी देवताओ ने हामी भर दी परन्तु अब समस्या यह थी की आखिर मनुष्य की इन शक्तियों को छुपाया कहा जाये.

एक देवता ने अपना मत बोला की क्यों न हम मनुष्यो की शक्तियों को घने जंगल में छुपा दे. परन्तु तभी एक देवता ने उन्हें रोकते हुए बोला की नहीं मनुष्य की शक्तियों को छुपाने की सबसे उत्तम जगह है कोई उच्चा पर्वत.

परन्तु एक अन्य देव विरोध करते हुए बोले की हमें शक्तियों को गुफा में छूपाना चाहिए. इस तरह सभी देवताओ ने अपने मत रखे.

देवताओ के मतों को सुनकर अंत में उनके गुरु बृहस्पति देवो से बोले की मेरे अनुसार मनुष्य की शक्तियों को छुपाने का सबसे उत्तम स्थान मनुष्य का मन है. हमें मनुष्य की शक्तियों को उनके मन की गहराइयों में छुपाना चाहिए.

क्योकि जब मनुष्य जन्म लेता है तब से उसका मन इधर उधर दौड़ने लगता है. ऐसे में मनुष्य कभी भी कल्पना नहीं कर पायेगा की उसकी सभी अद्भुत एवं विलक्षण शक्तियां उसी के भीतर ही छिपी हुई है.

इस प्रकार भ्रमित मनुष्य अपनी शक्तियों को बाह्य जगत में खोजता रहेगा. हम मनुष्य की इन शक्तियों को मनुष्य के मन की निचली तह में छुप देंगे.

गुरु ब्र्ह्स्प्ति के इस सुझाव पर सभी देवता सहमत हो गए. तथा फिर वैसा ही किया गया जैसा देवताओ के गुरु ने उन्हें बताया था. मनुष्य के शक्तियों का भण्डार उन्ही के भीतर छुपा दिया गया इसलिए यह बात कही जाती है की मनुष्य के मन में अलौकिक शक्तियां निहित है.

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