जब महादेव शिव के इस अवतार ने भगवान नृसिंह को ही लपेट लिया अपने पूछ में, पुराणों की अनसुनी गाथा !

देवो के देव महादेव शिव भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानते है तथा स्वयं भगवान विष्णु भी शिव को अपने आराध्य के रूप में पूजते है.

भगवान विष्णु के अनेक अवतार है जिनमे उनका एक अवतार हिरण्याकश्यप भी सम्लित है.

परन्तु आज हम आपको को एक ऐसी कथा के बारे में बताने जा रहे जहां महादेव शिव के ही अवतार को भगवान विष्णु के साथ युद्ध करना पड़ता है

तथा इतना ही नहीं भगवान शिव का यह अवतार भगवान विष्णु को अपनी पुंछ में लपेटकर आकाश मार्ग में उड़ा ले जाता है.

लिंगपुराण में दी एक कथा के अनुसार पृथ्वीलोक में हिरण्याकश्यप के बढ़ते पाप को रोकने तथा अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु को नृसिंह का अवतार लेना पड़ा.

नृसिंह अवतार में जब भगवान विष्णु खम्बा तोड़ कर प्रकट हुए तो उनके विशाल एवं क्रोधित रूप को देखकर सभी भयभीत हो गए. भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर उसके पापो का अंत किया पर इस पर भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ.

उनके क्रोध को शांत न होता देख सभी देव कैलाश पर्वत भगवान शिव के सम्मुख गए तथा उन्हें सारी बात विस्तार से बताई. देवताओ की बात सुन भगवान शिव ने अपने अंश भैरवरूपी वीरभद्र को आज्ञा दी की भगवान नरसिंह का क्रोध शांत करो.

भगवान शिव की आज्ञा पाकर वीरभद्र नृसिंह के पास गए तथा उनके क्रोध को शांत करने के लिए वे उनकी वंदना करने लगे.

जब नरसिंह की वंदना करने से भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ तो वीरभद्र का भी क्रोध जाग गया तथा दोनों के मध्य विवाद हो गया.

भगवान शिव की कृपा से वीरभद्र का शरीर अत्यधिक विशाल, व्यापक एवं विस्तृत हो गया. वीरभद्र शरभ रूप में अवतरित हुए.

शरभ अवतार में भगवान शिव का आधा शरीर मृग के समान था तथा आधा शरीर शरभ पक्षी (ग्रंथो में वर्णित छः पैरो वाला जानवर जो शेर से भी अधिक शक्तिशाली था) का था.

शरभ रूप में अवतरित महादेव शिव का भगवान विष्णु के अवतार नृसिंह के साथ बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ. यह युद्ध कई दिनों तक चला इस युद्ध में धीरे धीरे भगवान शिव के अवतार नृसिंह पर हावी होने लगे.

अंत में शरभ रूपी भगवान शिव ने नृसिंह को अपने पूछ में लपेटा तथा आकाश मार्ग में ले उड़े.

उन्होंने नृसिंह पर चोंच मार मार कर उन्हें घायल कर दिया.

तब भगवान विष्णु रूपी नृसिंह की क्रोधाग्नि शांत हुई. भगवान विष्णु नृसिंह का रूप त्याग कर अपने वास्तविक रूप में आये तथा शिव के शरभ अवतार से क्षमा याचना मांगी एवं उनकी स्तुति करी.

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