महाभारत से जुड़ा अत्यन्त रहस्मय खुलासा, यदि दुर्योधन नहीं करता अपनी जिंदगी की यह बड़ी भूल तो आज महाभारत कुछ और होती !

अब महाभारत का युद्ध समाप्ति की और अग्रसर था तथा इस युद्ध में बहुत से योद्धा एवं सैनिक अपने प्राणो की आहुति दे चुके थे. कुरुक्षेत्र की रण भूमि में संध्याकाल के दौरान जहाँ एक ओर अनेको सैनिकों के शव पड़े हुए थे वही दूसरी ओर जमीन में लेटा दुर्योधन भी अपनी अंतिम साँसे ले रहा था.

दुर्योधन के जीवन की इस अंतिम घडी में भगवान श्री कृष्ण उससे मिलने के लिए पधारे. भगवान श्री कृष्ण को देख दुर्योधन को क्रोध तो जरूर आया परन्तु फिर भी वह कृष्ण से कुछ नहीं बोला. भगवान श्री कृष्ण दुर्योधन के पास जाकर मुस्कराने लगे, जब दुर्योधन ने उनके मुस्कराने का कारण पूछा तो श्री कृष्ण बोले की दुर्योधन महाभारत के युद्ध में तुम्हारे पास ऐसा योद्धा था जो पांडवो सहित हमारी सम्पूर्ण सेना को परास्त कर सकता था, परन्तु तुम उसकी योग्य्ता को नहीं पहचान पाये और जिस कारण आज तुम्हारी यह दुर्दशा हो गई है.

कुरुक्षेत्र में लड़े गए युद्ध में कौरवों के सेनापति पहले दिन से दसवें दिन तक भीष्म पितामह थे, वहीं ग्याहरवें से पंद्रहवे तक गुरु दोणाचार्य ने ये जिम्मेदारी संभाली. लेकिन द्रोणाचार्य के मृत्यु के बाद दुर्योधन ने कर्ण को सेनापति बनाया.




यही दुर्योधन के महाभारत के युद्ध में सबसे बड़ी गलती थी इस एक गलती के कारण उसे युद्ध में पराजय का मुख देखना पड़ा. क्योकि कौरवों सेना में स्वयं भगवान शिव के अवतार मौजूद थे जो समस्त सृष्टि के संहारक है.

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