महादेव शिव के अस्त्र त्रिशूल से जुड़े इन गुप्त एवं गहरे राज को जान हैरान रह जायेंगे आप !


धार्मिक ग्रंथो में यह वर्णन मिलता है के इस सम्पूर्ण सृष्टि के संचालन का दायित्व त्रिदेवो (ब्र्ह्मा, विष्णु, महेश) के हाथो में है . ब्रह्म देव ने इस सृष्टि का निर्माण किया है, भगवान विष्णु इस सृष्टि के पालनकर्ता है तथा महादेव शिव संहारकर्ता है.

देवो के देव महादेव शिव अत्यन्त निराले तथा इसके साथ ही उनकी वेशभूषा भी अत्यन्त विचित्र है. भगवान शिव का प्रमुख अस्त्र त्रिशूल है. शिव शंकर के हाथ में मौजूद यह त्रिशूल अपने विषय में एक अलग ही कथा प्रस्तुत करता है.

कुछ लोग भगवान शिव के अस्त्र त्रिशूल को विनाश की निशानी मानते है. परन्तु वास्तव में भगवान शिव के त्रिशूल के रहस्य को समझपाना भगवान शिव के समान ही रहस्मयी एवं बहुत कठिन है.

हमारे हिन्दू धार्मिक पुराणों एवं ग्रंथो में अनेक गूढ़ रहस्य छिपे हुए है जिनमे से एक है भगवान शिव के हाथ में उपस्थित त्रिशूल.

आइये जानते है भगवान शिव के त्रिशूल से जुड़े अनोखे एवं रहस्मयी बाते.

भगवान शिव के त्रिशूल के संबंध में कहा जाता है की यह त्रिदेवो का प्रतीक ब्र्ह्मा, विष्णु, महेश है यानि इसे रचना, पालन एवं विनाश के रूप में देखा जाता है. इसे भुत, भविष्य तथा वर्तमान के साथ स्वर्ग, धरती तथा पाताल एवं इच्छा क्रिया एवं बुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है.

इसके साथ ही हिन्दू धर्म में देवियो के हाथो में भी त्रिशूल देखा जाता है. देवी शक्ति दुष्टों का विनाश अपने शस्त्र त्रिशूल से करती है. अतः भगवान शिव के त्रिशूल को त्रिदेवियों माता लक्ष्मी, सरस्वती एवं पार्वती के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है.

ऐसा भी कहा जाता है की भगवान शिव के त्रिशूल का निर्माण भौतिक लोक, पूर्वजो की दुनिया तथा विचारों की दुनिया के सर्वविनाश के लिए हुआ था.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *