जब लंकापति रावण ने राम से मांगी एक विचित्र दक्षिणा, रावण से जुडी एक अनोखी कथा !

प्रभु श्री राम ने रामेश्वरम में जब शिवलिंग की स्थापना करी थी तब ब्राह्मण के कार्य के लिए उन्होंने रावण को निमंत्रित किया. रावण ने भी उस निमंत्रण को स्वीकार किया तथा उस अनुष्ठान के आचार्य बने. रावण त्रिकालज्ञ था, वह यह जानता था की उसकी मृत्यु सिर्फ श्री राम के हाथो लिखी गई है. वह भगवान श्री राम से कुछ भी दक्षिणा में मांग सकता था परन्तु वह जानता था की उसकी मृत्यु भगवान श्री राम के हाथो लिखी गई है. आइये जानते है की आखिर कौन सी विचित्र दक्षिणा रावण ने श्री राम से मांगी थी ?

श्री राम द्वारा जामवन्त जी को रावण को निमंत्रण देने के लिए भेजा गया. जामवन्त जी के शरीर का आकर विशाल था, तथा कुम्भकर्ण के आकर की तुलना में वह तनिक ही छोटे थे. इस बार राम ने बुद्ध-प्रबुद्ध, भयानक और वृहद आकार जामवन्त को भेजा . पहले हनुमान, फिर अंगद एवं अब जामवन्त.



जब जामवन्त के लंका में पधारने की खबर लंका वासियो को चली तो सभी इस बात से डर से सिहर गए. निश्चित रूप से दिखने में जाम्पवन्त थोड़े अधिक भयावह थे. जामवन्त को सागर सेतु लंका मार्ग सुनसान मिला. कही कोई भी जामवन्त को दिख जाता तो वह केवल इशारे मात्र से राजपथ का रस्ता बता देता. उनके सम्मुख खड़े होने एवं बोलने का साहस किसी में न था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *