जाने कैलाश पर्वत एवं शिवलिंग में स्थापित आश्चर्यचकित करने वाले अलौकिक शक्तियों का वैज्ञानिक सत्य !


सनातन धर्म के अनुसार जब सम्पूर्ण बर्ह्माण्ड में कुछ नहीं था तब ईश्वर ने स्वयं प्रकट होकर अपने में एक स्त्री शक्ति को स्थान देकर पृथक किया. ईश्वर की स्त्री पुरष शक्ति ने विभक्त होकर त्रिदेवो एवं त्रिशक्तियों को उतपन्न किया.

महादेव शिव ने ब्रह्माण्ड सृजनी शक्ति के साथ एक दिव्य लिंग के रूप में प्रकट हुए जिसका ना कोई आदि था और न कोई अंत. उस दव्य लिंग ने ब्र्ह्मा एवं विष्णु से कहा की जो भी मेरा आदि या अंत पा लेगा वह सर्वपूजित होगा. अंत में सत्य की वजह से भगवान विष्णु विजय हुए.

उस ब्रह्माण्ड सृजनी शक्ति के साथ भगवान शिव ने लिंग रूप में धरती पर वास किया. वह शक्ति कुछ और नहीं बल्कि अणु एवं परमाणु शक्ति थी जिसके द्वारा आज विनाशकारी बमो का निर्माण किया जाता है पहले इसी शक्ति का प्रयोग ब्र्ह्मास्त्र के रूप में किया जाता था.

शिवलिंग का जो आकार है वह भी इसी आधार पर है की इसके अंदर उपस्थित संचारित होने वाली ऊर्जा और विफसोट अंदर ही बनी रहे. ऐसा ही आकार आत्मा का भी माना जाता है.

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