”मृत्यु टाले से भी नहीं टलती” एक अनोखी पौराणिक कथा जो खोल देगी आपकी आँखे !

lord vishnu

एक समय की बात है जब भगवान विष्णु अपने गरुड़ पर बैठ कर कैलाश पर्वत पर गए थे . गरुड़ को द्वार पर छोड़ कर स्वयं भगवान शिव से मिलने उनके पास अंदर चले गए.

और कैलाश पर्वत की अपूर्व प्राकृतिक सुंदरता को देख कर गरुड़ मंत्रमुग्ध गया लेकिन उसी समय उनकी नजर एक छोटी सी खूबसूरत चिड़िया पर पड़ी.

चिड़िया इतनी सुंदर थी कि गरुड़ के अपने सारे मन की विचार उसकी और आकर्षित होने लगे.

उसी वक़्त कैलाश पर्वत पर यम देवता उपस्थित हुए और फिर अंदर जाने से पहले उन्होंने उस छोटी सी सुन्दर चिड़िया को आश्चर्य की दृष्टि से देखा.

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गरुड़ देव समझ गए की उस प्यारी सी सुन्दर चिड़िया का अंत समय निकट है और यमदेव देवता कैलाश पर्वत से बाहर निकलते ही उस चिड़िया को अपने साथ यमलोक में ले जाएँगे.

यह देखकर गरूड़ को उस पर दया आ गई. मैं इतनी सुन्दर और प्यारी छोटी चिड़िया को अपने सामने मरते हुए नहीं देख सकता.

और फिर गरुड़ ने उस चिड़िया को अपने पंजों में दबाया और कैलाश से 1000 कोश दूर एक घने जंगल में एक बड़ी चट्टान के ऊपर छोड़ दिया, और स्वयं वापस कैलाश पर्वत पर आ गया.

कुछ समय बाद जब यम देव कैलाश से बाहर आए तो गरुड़ ने यम देव से पूछा की उन्होंने उस प्यारी चिड़िया को इतनी आश्चर्य से भरी हुई नज़रो से क्यों देखा था.

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यमदेव ने कहा की गरुड़ मुझे उस छोटी सी चिड़िया को देखकर यह ज्ञात हुआ की वो चिड़िया कुछ ही देर के बाद यहाँ से हजारों मील दूर एक सांप के द्वारा खा ली जाएगी.

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