बाबा अमरनाथ से जुड़ा चौंका देने वाला राज, इस कारण नहीं बना यह पवित्र धाम ज्योतिर्लिंग !

अमरनाथ वह पवित्र तीर्थस्थल है जहां भोलेनाथ शिव ने माता पार्वती को अमरत्व से जुड़ा रहस्य बताया था. यह स्थान शिव और माता पार्वती के निवास स्थान के रूप में भी जाना जाता है.

बहुत ही प्राचीन एवं अलौकिक शक्तियों के खजानों से भरा यह धाम अपने आप में अनेक शक्तियों को समेटे हुए है.

इस चमत्कारी गुफा में हर साल भगवान शिव हिमलिंग के रूप में भक्तो को दर्शन देते है. इसलिए बाबा अमरनाथ यहाँ भक्तो के बीच बाबा बर्फानी के नाम से भी प्रसिद्ध है.

अमरनाथ के इस पवित्र एवं चमत्कारी गुफा के बारे में पुराणों में यह बतलाया गया है की महादेव शिव माता पार्वती के साथ इस गुफा में आये थे तथा उन्हें एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कथा सुनाई थी जो व्यक्ति को मृत्यु पर विजयी दिलाने के संबंध में थी.

अर्थात यह कथा अमरत्व से जुडी थी जो व्यक्ति को जन्म एवं मृत्यु के बंधन से मुक्त करती है. इस घटना को याद दिलाने के लिए अमरनाथ तीर्थ के यात्रा मार्ग पर अनेक निशानियाँ भी मौजूद है.

तथा आज भी यहाँ वे दो अमरता प्राप्त कबूतर दिख जाएंगे जिन्होंने भगवान शिव की इस कथा को छिपकर सुन लिया था.

इस पवित्र धाम की यह भी मान्यता है की जो भी व्यक्ति अमरनाथ तीर्थस्थल में आता है, वह बाबा बर्फानी के दर्शन पाकर वह अपने सभी पापो एवं कष्टों से मुक्ति पा जाता है तथा व्यक्ति को शिव के पवित्र धाम की प्राप्ति हो जाती है.

परन्तु इतनी विशेषताओं एवं चमत्कारिक शक्तियों से परिपूर्ण होने के बावजूद इस पवित्र तीर्थस्थल को ज्योतिर्लिंग की मान्यता क्यों प्राप्त नहीं हुई.

आइये शिव से जुड़े इस राज के रहस्य को जानते है.

अमरनाथ का पवित्र धाम एक ज्योतिर्लिंग नहीं है, आखिर ऐसा क्यों है इसे जानने से पहले आइये 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में. सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ॐकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्रयम्बकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर, घृष्णेश्वर.

इन सभी ज्योतिर्लिंगों में एक बात समान है जो अमरनाथ धाम से थोड़ा अलग है. अमरनाथ का शिवलिंग किसी भक्त की श्रद्धा एवं भक्ति से उतपन्न नहीं हुआ था.

अमरनाथ में भगवान शिव तथा माता पार्वती अपनी इच्छा अनुसार आये थे, तथा भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी. इसका प्रतीक अमरनाथ में स्थित हिमशिवलिंग है.

परन्तु सभी ज्योतिर्लिंगों की उत्तपति भक्तो की तपस्या से हुई, जैसे की सोमनाथ में स्थित ज्योतिलिंग की स्थापना चंद्र देव के कारण हुई थी.

केदारनाथ में भगवान विष्णु ने नरनारायण के रूप में भगवान शिव को प्रसन्न किया था. रामेश्वरम में प्रभु श्री राम की तपस्या से ज्योतिलिंग की स्थापना हुई.

इसके साथ ही दूसरी बात यह की सभी ज्योतिर्लिंग स्थायी है अर्थात वे एक स्थान में स्थिर रहते है परन्तु अमरनाथ की गुफा में बनने वाला हिमलिंग स्थायी नहीं है, यह हमेशा कायम नहीं रहता है. यह कुछ समय के लिए हिमलिंग के रूप में रहता है तथा इसके बाद विलीन हो जाता है.

ज्योतिर्लिंग की दूसरी शर्त यह होनी चाहिए की उसमे स्थित शिवलिंग स्थायी एवम नित्य होना चाहिए.

ज्योतिर्लिंग की सबसे बड़ी बात यह भी है की यह शिवलिंग साक्षात् भगवान शिव के स्वरूप माने जाते है, क्योकि यह भगवान शिव के भक्तो की तपस्या के कारण स्थापित हुए थे.

जबकि अमरनाथ की गुफा में बनने वाला शिवलिंग भगवान शिव एवम माता पार्वती के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. अमरनाथ शिव का स्थायी नही अस्थायी निवास स्थान है.

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