हिन्दू धर्म के महान राजनीतज्ञ चाणक्य के अनुसार “न करें इस प्रकार की स्त्रियों से विवाह” !

आचार्य चाणक्य महान अर्थशास्त्री, राजनीतज्ञ व कुटनितज्ञ थे. आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित उनके प्रसिद्ध ग्रंथो में से एक चाणक्यनिति शास्त्र में मनुष्य को उनके जीवन जीने के तरिके में सुधार लाने के सुझाव बताए गए है.

इस शास्त्र में ऐसे अनेक अनमोल एवं महत्वपूर्ण जीवन उपयोगी सूत्र दिए गए है जिन्हे अपने जीवन में अपनाकर मनुष्य चमत्कारिक रूप से बदलाव पा सकता है.

महान कूटनीतिज्ञ आचर्य चाणक्य जिंदगी के अनेक दावपेंच जानते थे. वह अपने शत्रु से सदैव दो कदम आगे रहते थे, किस के मन में क्या चाल रहा है तथा उसकी शत्रु की अगली चाल क्या होगी यह सब आचर्य चाणक्य आसानी से भाप जाते थे.

अपने जिंदगी के इन्ही अनुभवों से आचर्य चाणक्य ने अपने ग्रन्थ की रचना करी, जिसके अध्धयन से हम विभिन्न प्रकार के मनुष्य के चरित्र तथा उसके स्वभाव के बारे में जानकारी हासिल कर सकते है.

चाणक्य नीति के द्वारा स्त्री, पुरुष, बच्चे सभी के स्वभाव को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है. मित्र या किसी संबंधी के साथ जुड़े रिश्तों को गहराई से समझा जा सकता है. इन सभी रिश्तों को जिस नजर से हम नहीं देख सकते उस नजरिए के बारे में इस ग्रन्थ में समझाया गया है.

आचार्य चाणक्य ने इस ग्रन्थ में अनेक जीवन उपयोगी नीति सूत्र दिए है, जिन्हे पढ़ने और समझने से हम लाभान्वित हो सकते है. आज हम आपको इन्ही नीति सूत्रों से संबंधित कुछ जानकारी देंगे जो स्त्रियों से संबंधित है.

अपने ग्रन्थ में चाणक्य ने स्त्रियों के संबंध में काफी कुछ कहा है. स्त्रियों का स्वभाव, उनकी सोच, उनकी फितरत तथा किस समय में वह कैसा बरताव करती है इस सब अध्ययन किया है आचर्य चाणक्य ने.

उन्होंने एक ऐसी बात कहि जिसे सुन कर सायद हम सहमत न हो परन्तु उनके अनुसार स्त्रियाँ भरोसे करने लायक नहीं होती है. ऐसा कहने के पीछे उनके अनुभव एवं ठोस तथ्य शामिल है.

चाणक्य के अनुसार महिलाओं के स्वाभाव में ही ऐसे लक्षण होते है जो उन्हें भरोसे लायक नही बनाती. ऐसा इसलिए वे किसी भी बात को अधिक समय तक गुप्त नहीं रख सकती. एक बात को दूसरे तक पहुंचाना उनकी आदत होती है.

इसलिये यदि आप जो भी कोई बात स्त्री को बताएंगे इसकी बहुत ही कम गारंटी है की वह दूसरों तक न पहुंचे. इसलिए चाणक्य स्त्रियों को भरोसे लायक नहीं समझते. स्त्रियों के समान्य लक्षणों के अध्ययन के साथ ही आचार्य चाणक्य ने स्त्रियों के संबंध में कुछ ऐसी बाते भी नीति शास्त्र में लिखी है जो उन्हें विवाह के योग्य नहीं बनाती. अर्थात इस प्रकार की स्त्रियों से पुरुष को भूल से भी विवाह नहीं करना चाहिए.

आचार्य चाणक्य कहते हैं – “वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्. रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले.“ इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य ने यह समझाने का प्रयास किया है कि ‘कैसी स्त्री से विवाह करना चाहिए और कैसी स्त्री से नहीं’.

सुंदरता :- आचार्य चाणक्य के अनुसार केवल स्त्रियों की सुंदरता को देखते हुए ही उससे विवाह नहीं करना चाहिए. यदि कोई पुरुष किसी स्त्री को उसके सुंदरता के आधार पर परखता है तथा सुंदरता के आधार पर ही स्त्री को पसंद कर उससे विवाह कर लेता है तो इस संसार में उससे बड़ा मुर्ख कोई नहीं.

संस्कार :- विवाह के लिए स्त्री के संस्कार, उसका स्वभाव, उसके लक्षण, उसके गुण-अवगुणों के बारे में जानना चाहिए. इन सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद ही स्त्री का विवाह के लिए चुनाव करना चाहिए। अन्यथा सुंदरता के आधार पर गलत चुनाव करने से वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रहता.

आचार्य चाणक्य के ग्रन्थ में संस्कारी स्त्री के महत्वता के विषय में बतलाया गया है की एक संस्कारी स्त्री घर को स्वर्ग के समान बना देती है, वह अपने पति सहित उसके पुरे परिवार का ख्याल रखती है. वही एक असंस्कारी स्त्री अच्छे घर को भी पल भर में तहस नहस कर देती है.

गुण :- यदि स्त्री सुंदर नहीं है लेकिन उसके संस्कार अच्छे हैं तो पुरुष को उससे विवाह कर लेना चाहिए. क्योंकि यही वह स्त्री है जो उसके भविष्य को सुखद बनाएगी. ऐसी स्त्री उसे एक श्रेष्ठ परिवार देगी.

लेकिन इसके जगह ऐसे स्त्री का चुनाव कर लिया जाए जो संस्कारी नहीं है साथ ही अपने परिवार की अहमियत भी नहीं समझती. ऐसी स्त्री से न केवल शादी टूटती है बल्कि सभी रिश्ते भी टूट जाते है.

इस प्रकट की स्त्री अधार्मिक होती है, वह रिश्तों पर विश्वास नहीं करती. वह हर पल अपने रिश्तों को तोड़ने के प्रयास में लगी रहती है. इस प्रकार की स्त्री अपने परिवार को सुखी नहीं रख सकती तथा उन्हें सदैव दुःख पहुंचती रहती है.

ऐसे चरित्र वाली स्त्रियाँ न केवल परिवार का बल्कि पुरे कुल का नाश करके रख देती है. अतः विवाह के लिए किसी पुरुष को चाहिए की वह एक संस्कारी स्त्री का चुनाव करें, पुरुष को स्त्री की सुंदरता उसके मन में देखनी चाहिए ना की तन की.

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