वासुदेव कृष्ण यदि न करते ये 5 छल, तो आज कुछ ओर ही होता महाभारत का परिणाम !

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महाभारत युद्ध धर्म की स्थापना के लिए लड़ा गया अतः यह प्रसिद्ध युद्ध धर्मयुद्ध के नाम से भी जाना जाता है. परन्तु इस युद्ध में विजयी होने के लिए पांडवो ने अनेक ऐसे कार्य भी करे थे जिसे हम धर्मानुसार उचित नहीं मान सकते.

महाभारत के इस युद्ध में सबसे बड़ी भूमिका भगवान विष्णु के अवतार वासुदेव श्री कृष्ण की रही थी. भगवान श्री कृष्ण ने न्याय एवं सत्य के विजयी को सुनिश्चित करने के लिए धर्म की अपनी पर‌िभाषा गढ़ी और ऐसे चाले चली जिससे पांडव महाभारत के विनाशकारी युद्ध में विजयी हुए.

महाभारत के युद्ध को जितने के लिए पांडवो को सर्वप्रथम यह करना जरूरी था की भीष्म पितामह इस युद्ध से हट जाए. इसके लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी चाल चलते हुए भीष्म पितामह के साथ युद्ध में शिखण्डी को अर्जुन के स्थान पर रथ में रखा.

भीष्म शिखण्डी को भी स्त्री के समान ही मानते थे क्योकि वह आधा स्त्री था और आधा पुरुष वास्तव में शिखण्डी अपने पूर्व जन्म में अम्बा नाम की एक राजकुमारी थी. तथा भीष्मपिताम किसी स्त्री पर वार नहीं करते थे, ऐसा करना वह धर्म के विरुद्ध मानते थे.

इसी का फायदा उठाते हुए श्री कृष्ण ने युद्ध में भीष्म पितामाह के सामने शिखण्डी को खड़ा कर दिया. अपने सामने स्त्री को देख भीष्म पितामह ने अपने हथियार फेक दिए.

भगवान श्री कृष्ण ने तुरंत अर्जुन को भीष्म पितामह पर बाण चलने को कहा. अर्जुन के बाणों की वर्षा से भीष्म पितामह धरासायी हो गए.

भीष्म पितामह के बाद द्रोणाचार्य एक ऐसे योद्धा थे जिनके रहते पांडवो का युद्ध जितना नामुमकिन था. उन्हें पांडवो के विजयी के रास्ते से हटाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने युधिस्ठर को झूठ बोलने के लिए प्रेरित किया.

युधिस्ठर ने द्रोणाचार्य को बताया की अश्व्थामा मर गया परन्तु वास्तव में मरा था एक अश्वथामा नाम का हाथी. युधिस्ठर के इस असत्य को सत्य मानकर द्रोणाचार्य ने अपने अस्त्र फेक दिए तथा विलाप करने लगे. इसी का फायदा उठाते हुए धृष्ठद्युम्न ने द्रोणाचार्य पर बाणों की वर्षा कर दी.

महाभारत के युद्ध के दौरान एक दिन सूर्य गर्हण हुआ था. वास्तविकता में एक बार अर्जुन यह प्रतिज्ञा लेते है की वे सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ का वध कर देंगे अन्यथा अपने आपको अग्नि चिता में भष्म कर लेंगे.

अगर ऐसा हो जाता तो पांडवो की युद्ध में हार निश्चित थी. परन्तु भगवान श्री कृष्ण अपने सुदर्शन चक्र को आदेश देकर उनके द्वारा सूर्य की रौशनी कुछ देर के लिए छुपा दी. इससे सबको भ्रम हो गया की सूर्यास्त हो गया है. यह सूर्य गर्हण की स्थिति जैसा था.

भगवान श्री कृष्ण के इस छल में फसकर जयद्रथ सबके समाने आ गया तथा अर्जुन को आत्मदाह के लिए उकसाने लगा. इसी बीच श्री कृष्ण ने सूर्य से अपने सुदर्शन चक्र को हटा लिया. तथा सूर्य पुनः निकल आने पर अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया तथा अपनी प्रतिज्ञा पूरी करी.

भगवान श्री कृष्ण ने चौथा छल दानवीर कर्ण के साथ किया भगवान श्री कृष्ण ने देवराज इंद्र के साथ ब्राह्मण का वेश धारण करते हुए कर्ण के द्वार पर आये तथा उनसे उनके कवच कुंडल दान में ले लिए.

जब अर्जुन के साथ युद्ध में कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धस गया था तो उस पहिए को निकालने के लिए कर्ण ने अपने बाणों को रख रथ का पहिया उठाने लागे उसी समय भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कर्ण पर बाण चलने के लिए उकसाया. तथा अर्जुन ने दिव्यास्त्र का प्रयोग कर कर्ण का वध कर दिया.

दुर्योधन का अंत भी भगवान श्री कृष्ण के बुद्धि एवं छल के कारण ही संभव हो पाया. भगवान श्री कृष्ण ने दुर्योधन को अपनी माता के पास निर्वस्त्र ना जाने की सलाह दी जिस से उसके कमर से निचे का शरीर व्रज का नहीं हो पाया.

दुर्योधन के साथ युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने भीम को दुर्योधन के कमर से नीचे वार करने की सलाह दी, जो युद्ध के नियम के विरुद्ध था. भीम द्वारा दुर्योधन के कमर पर वार करने के कारण उसका वध हुआ.

इस तरह भगवान श्री कृष्ण के महाभारत युद्ध में चले गए चालू के कारण पांडवो को युद्ध में विजयी प्राप्त हुई.

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