माँ काली का शक्तिशाली महामंत्र, यह ग्रह एवं भाग्य से जुडी हर बाधा को काट देता है !

माँ काली एवं चंडी के गुणगान शब्दों से नहीं, भावों से किये जाते हैं. इनकी महिमा अनंत है, इन्हीं से सृष्टि है यानी सम्पूर्ण ब्रह्मांड की संचालिका ये ही हैं. इनके अनंत रूप हैं,

मूलतः नौ रूपों में जानी जाती हैं. नाम असंख्य हैं, मूलतः 1008 नामों से जानी जाती हैं. आपदा से घिरे भक्तों को स्मरण मात्र से मुक्त कराने वाली देवी ये ही हैं.

माँ कलिका का रूप जितना भयावाह है उससे कही ज्यादा मनोरम और भक्तो के लिए आनंददायी है . आमतौर पर काली की पूजा सन्यासी और तांत्रिको द्वारा की जाती है. माना जाता है की माँ काली काल का अतिक्रमण कर मोक्ष प्रदान करती है.

कलियुग में मानव कल्याण हेतु देवी की आराधना ही सर्वोपरि है. तभी तो शारदीय नवरात्र में भारत के प्रत्येक गाँव-शहर में माँ की मूर्ति पूजा होती है तथा वर्ष भर स्त्री-पुरुष अपने-अपने घरों में माँ की पूजा अर्चना व आरती करते रहते हैं.

ये ही माँ सरस्वती के रूप में विद्या की अधिष्ठात्री हैं तो लक्ष्मी के रूप में धन की अधिष्ठात्री देवी हैं. यूं कहें तो भिन्न-भिन्न रूपों में भिन्न-भिन्न कार्यों का संचालन करती हैं.

आद्यशक्ति होने के कारण माता अपने भक्तो की हर इच्छा पूर्ण करती है. तांत्रिको और ज्योतिशो के अनुसार माँ काली के कुछ मन्त्र ऐसे है जो किसी भी व्यक्ति के ग्रह एवं भाग्य से जुड़े हर बाधाओं को दूर कर व्यक्ति को हर परेशानियों से मुक्ति दिलाता है.

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