जाने वह विचित्र रहस्य जिस कारण लंकेश्वर रावण ने नहीं रखा था देवी सीता को अपने महल में !

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अनेको संस्कृतियों, धर्मो एवं मान्यताओं से भरे हमारे देश में लोगो की अलग अलग देवी देवताओ के प्रति अपनी आस्था एवं श्रद्धा है.

देवी देवताओ में भगवान विष्णु के अवतार एवं मर्यादा पुरोषत्तम श्री राम के प्रति भक्तो की अगाद्य श्रद्धा है. भगवान श्री राम अपने सम्पूर्ण जीवन काल में सदैव मर्यादाओ से बंधे रहे.

पुत्र, पति, भाई एवं राजा इन सभी रूपों में भगवान श्री राम ने बखूबी अपने धर्म एवं कर्तव्यों को पालन किया. भगवान श्री राम की पत्नी सीता ने भी अपने पतिव्रता धर्म का पालन किया.

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लंकेश्वर रावण के कैद में होते हुए भी कभी रावण माता सीता के समीप आने अथवा उन्हें छूने का भी दुस्साहस नहीं कर पाया.

परन्तु आप ने क्या कभी सोचा है की असुर सम्राट लंकापति रावण यदि चाहता तो वह माता सीता को विवाह के लिए जबरजस्ती विवश कर सकता है अथवा अपनी बात मनवाने के लिए वह माता सीता को कष्ट दे सकता था.

लेकिन रावण ने ऐसा कुछ नहीं किया तथा वह माता सीता के स्वीकृति का इन्तजार करता रहा. तो क्या वह माता सीता के क्रोध से डरता था अथवा वह भगवान श्री राम के क्रोध से ?

क्या वह किसी वचन से बंधा हुआ था. और आखिर रावम में अपने आलिशान विशाल स्वर्ण महल को छोड़ माता सीता को वाटिका में क्यों रखा ?

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इन सभी सवालों के जवाब पुराणों में छिपे हुए है जिसके बारे में हम आज आपको बताने जा रहे है.

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