यदि करना है महादेव शिव को प्रसन्न तो श्रावण में भूल से भी मत कर ये 8 कार्य !

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श्रावण का महीना आते ही वातावरण में एक अलग से बदलाव आ जाता है हर तरफ बम बम भोले व हर हर महादेव की पुकार सुनाई देने लगती है, क्योकि ये भगवान शिव के भक्ति का महीना है.

श्रावण के महीने को सावन का महीना भी कहा जाता है, इस महीने में भगवान शिव की पूजा उत्तम मानी गयी है. इस माह की पूजा मोक्षदायनी मानी गई है.

श्रावण के महीने में जो भी भक्त भगवान शिव की सच्ची श्रद्धा से भक्ति करता है महादेव शिव उसकी सभी परेशानियों को दूर कर देते है, उसके कार्यो में आ रही मुश्किलें दूर हो जाती है, तथा देवी देवताओ की कृपा प्राप्त होते है.

सावन के महीने में भगवान शिव के भक्तो की हर शिव मंदिर में भीड़ लगी रहती है. भगवान शिव का स्वभाव ऐसा है की वह शीघ्र ही अपने भक्तो से प्रसन्न हो जाते है परन्तु यदि उनका किसी भी तरह से अनादर किया जाए तो उनका क्रोध बहुत ही भयानक होता है.

आज हम आपको शास्त्रों के अनुसार बताए गए 8 ऐसी बाते बताने जा रहे है जिन्हे भूल से भी इन श्रावण माह में न करें, अन्यथा भगवान शिव की कृपा आपको प्राप्त नहीं हो पाएगी तथा आपकी समस्या बनी रहेगी.

1 . शिवलिंग ( shivling ) पर ना चढ़ाए हल्दी :-

शिवजी की पूजा करते समय ध्यान रखे की शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए. हल्दी जलधारी पर चढ़नी चाहिए. हल्दी देवियों पर चढ़ाई जाती है जबकि भगवान शिव पुरुष तत्व है.

यही कारण ही की शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ती. हल्दी जलधारी पर चढ़ानी चाहिए क्योकि वह माता पार्वती का प्रतीक है.

2 . दूध का सेवन ना करे :-

सावन के महीने में दूध का सेवन नहीं करना चाहिए, यही बात बताने के लिए श्रावण के महीने में भगवान शिव पर दूध चढ़ाने की प्रथा आरम्भ हुई थी. वैज्ञानिकों के अनुसार श्रावण के महीने में दूध वात बढ़ाने का काम करता है.

अगर दूध का सेवन करना हो तो दूध को खूब उबालकर ही प्रयोग में लाये. कच्चे दूध का सेवन ना करे. दूध के सेवन से उत्तम है उसे दही के रूप में परिवर्तित कर सेवन करे.लेकिन भाद्र मॉस में दही के सेवन से दूर रहे क्योकि दही का सेवन भाद्र मॉस में हानिकारक होता है.

3 . सावन में बेगन खाना है वर्जित :-

सावन में बैंगन खाना भी वर्जित माना गया है.सावन में महीने में साग के बाद बैंगन भी ऐसी सब्जी है जिसे खाना वर्जित माना गया है. इसका धार्मिक कारण यह है कि बैंगन को शास्त्रों में अशुद्घ कहा गया है. यही वजह है कि कार्तिक महीने में भी कार्तिक मास का व्रत रखने वाले व्यक्ति बैंगन नहीं खाते हैं.

वैज्ञानिक कारण यह है कि सावन में बैंगन में कीड़े अधिक लगते हैं. ऐसे में बैंगन का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए सावन में बैंगन खाने की मनाही है.

4 . इन लोगो का अपमान न करे :-

सावन के महीने में इस बात विशेष ख्याल रखे की आप से कही बुजुर्ग, माता-पिता, गुरु, भाई, पति अथवा पत्नी, मित्र व ज्ञानी लोगो का अपमान न हो जाये. श्रावण माह में इन बातो का पालन अवश्य होना चाहिए अन्यथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त नहीं होती.

शिवजी ऐसे लोगों से प्रसन्न नहीं होते हैं जो यहां बताए गए लोगों का अपमान करते हैं. ये सभी लोग हर स्थिति में सम्मान के पात्र हैं, हमेशा इनका सम्मान करें.

5 . ना करें मॉस मदिरा का सेवन :-

सावन का दुसरा मतलब सात्विलकता का पालन करना है, क्योकि ऐसी मान्यता है की इस माह भगवान शिव भगवान विष्णु के कार्यो का संचालन भी स्वयं करते है.

इसलिए श्रावण के महीने में मॉस मदिरा के सेवन से दूर रहना चाहिए. ऐसा करने से मन शांत रहता है. तथा क्रोध एवं काम की भावना को नियंत्रण में रखने में सहायता मिलती है.

6 .सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए :-

सुबह का समय पूजा के लिए बढ़िया रहता है, शास्त्रों में भी सूर्योदय के समय की गई पूजा को उत्तम बतलाया गया है. अतः श्रावण मॉस में यदि आप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हो तो सुबह जल्दी उठना चाहिए.जल्दी जागे तथा स्नान आदि क्रिया के बाद भगवान शिव की पूजा करे.

यदि देर तक सोते रहेंगे तो आलस्य बढ़ेगा. श्रावण का वातावरण उत्तम होता है अतः इस समय भगवान शिव की पूजा करने के बाद भर्मण के लिए जाए यह स्वास्थ के लिए उत्तम रहता है.

सुबह के समय मन शांत रहता है इसी वजह से पूजा के समय एकाग्रता भी बनी रहती है. तथा एकाग्रता से गई पूजा शीघ्र फल प्रदान करती है.

7 . सावन में हरी पत्तेदार सब्जी खाना भी बताया गया है वर्जित :-

सावन के महीने में स्वास्थ को ध्यान में रखते हुए कई ऐसी बात कहि गयी है जो इस महीने में खाना वर्जित है. वैसे तो साग यानि हरे पत्तेदार सब्जी खाना स्वास्थ के लिए उत्तम रहता है परन्तु श्रावण के महीने में इसका सेवन वर्जित बताया गया है.

क्योकि सावन में साग में वात बढ़ाने वाले तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है जिस कारण साग गुणकारी नहीं रहता.

एक और अन्य कारण के अनुसार इस महीने में किट पतंगो की मात्रा भी बढ़ जाती है. तथा उनका भोजन हरी साग एवं घास फुस होता है. अतः हरी सब्जियां इन मौसमों में हानिकारक हो जाती है. यही कारण है की श्रावण के महीने में हरी साग का सेवन वर्जित है.

8 . पति -पत्नी ध्यान रखें ये बातें :-

अधिकतर परिवारों में पति-पत्नी के बीच वाद-विवाद, छोटी-छोटी लड़ाइयां अक्सर होती रहती हैं. ये आम बात है, लेकिन जब छोटी-छोटी बातें बढ़ जाती हैं तो पूरा घर अशांत हो जाता है. सावन माह में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घर में क्लेश ना हो.

जिन घरों में क्लेश होता है, अशांति रहती है, वहां देवी-देवता निवास नहीं करते हैं. सावन माह में शिवजी की कृपा चाहते हैं तो घर में प्रेम बनाए रखें और एक-दूसरे की गलतियों को भूलकर आगे बढ़ें.

घर में शांति रहेगी तो जीवन भी सुखद बना रहेगा, मन प्रसन्न रहेगा. प्रसन्न मन से पूजा करेंगे तो मनोकामनाएं भी जल्दी पूरी हो सकती हैं.

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