जब माता पार्वती ने महादेव शिव को ही दे दिया ब्राह्मण बालकों को दान, शिव पुराण की एक रोचक कथा !

जब कैलाश पर्वत में कार्तिकेय का जन्म हुआ तो माता पर्वती एवं भगवान शिव ने अपने इस पुत्र के छः रूपों के पालन पोषण के लिए उन्हें कृतिकाओं (सप्त ऋषि की पत्नियों ) को सोप दिया.

महादेव शिव के कार्तिकेय को कृतिकाओं को
सौंपने का एक और कारण यह भी था की कृतिकाओं की देख रख में कार्तिकेय उन ज्ञान को गर्हण कर लेंगे जो उन्हें देवताओ के सेनापति बनने के समय मदद करेगी तथा वह दुष्ट तारकासुर का वध कर देवताओ को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाएंगे.

तारकासुर एक शक्तिशाली दैत्य जिसे ब्र्ह्मा जी का वरदान प्राप्त था तथा वह केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथो ही मारा जा सकता था. जब कार्तिकेय बड़े हुए तो उन्होंने तारकासुर का वध किया तथा इसके बाद उन्हें दूसरे राज्य उसके सुरक्षा के लिए भेज दिया गया.

अतः इस प्रकार माता पार्वती अपने पुत्र कार्तिकेय के साथ ज्यादा समय व्यतीत नहीं कर पायी. माता पार्वती की एक पुत्री भी थी जिनका नाम अशोकसुंदरी था, अशोकसुंदरी भी बाल्यअवस्था में ही ध्यान योग से प्रेरित होकर कैलाश पर्वत से दूर किसी अन्य स्थान में तपस्या के लिए चली गई.

क्योकि भगवान शिव भी अपना अधिकतर समय ध्यान में व्यतीत करते थे अतः माता पार्वती अकेलेपन से परेशान होकर अपनी माता मैनावती के पास इस समस्या का उपाय पूछने गई.

देवी पार्वती की माता इस समस्या की गहराई में जाते हुए बोली की असली समस्या तो तुम्हारे पति महादेव शिव है, यदि वह तपस्या के स्थान पर अपने परिवार को समय दे तो यह समस्या उपन्न ही नहीं होगी.

उसी समय नारद मुनि वहां प्रकट हुए तथा जब देवी पार्वती के माता ने नारद मुनि की सामने समस्या रखी तो नारद मुनि बोले की यही समस्या एक बार देवराज की इंद्र की पत्नी इंद्राणी के साथ भी उतपन्न हुई थी. परन्तु उन्होंने इस समस्या से मुक्ति प्राप्त करने के लिए देवराज इंद्र को मुझे दान कर दिया.

क्योकि देवराज इंद्र मेरे लिए किसी भी तरह से उपयोगी नहीं थे इसलिए मेने उन्हें वापस इंद्राणी को सोप दिया. तब से देवराज इंद्र अपना अधिकतर समय अपने घर में व्यतीत करते है तथा इंद्राणी को भी उनकी समस्या से मुक्ति मिल गई.

जब मैनावती एवं देवी पार्वती ने नारद जी की यह बात सुनी तो उन्होंने विचार किया की क्यों न वह भी महादेव शिव को दान कर दे. तब देवी पार्वती ने नारद मुनि जी से पूछा की आखिर उन्हें माहदेव शिव को किसे दान करना चाहिए ?

तब नारद मुनि ने उपाय सुझाते हुए माता पार्वती से कहा की देवी आप महादेव शिव को ब्र्ह्मा जी के चार पुत्र सनक, सनातन, सनन्दन और संतकुमार को दान कर दो, यह उत्तम रहेगा.

नारद मुनि की आज्ञा से माता पार्वती ने महादेव शिव को ब्र्ह्मा जी के चार पुत्रों को दान कर दिया. माता पर्वती सोच रही थी की जब कुछ दिनों बाद चारो ब्रह्म पुत्र महादेव शिव को उनके लिए अनुपयोगी समझेंगे तो वे वापस माता पर्वती को महादेव सोप देंगे. परन्तु ऐसा नहीं हुआ, चारो ब्रह्म पुत्रों ने भगवान शिव को अपना सेवक बना लिया.

इस पर माता पार्वती अब और दुखी हो गयी तथा उधर महादेव शिव के अनुपस्थिति में पूरी सृष्टि का संचालन भी अस्त व्यस्त होने लगा. तब सभी देवता माता पर्वती के साथ मिलकर उन चारो ब्रह्म पुत्रों के पास पहुंचे तथा भगवान शिव को वापस देने की प्राथना करने लगे.

माता पर्वती ने उन ब्रह्म पुत्रों को समझाया की अगर भगवान शिव पुनः सृष्टि के संचालन में सहयोग नहीं देते तो पूरी सृष्टि प्रलयमय हो जायेगी.

इस प्रकार उन्हें बहुत समझाने पर चारो ब्रह्म पुत्रों ने महादेव शिव को वापस माता पार्वती को सोप दिया.

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