भीष्म ने मृत्यु से पुर्व अर्जुन को बताई थी जीवन से जुडी एक बहुत ही बड़ी सच्चाई, जो बदल देगी आपकी पूरी जिंदगी !

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महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामाह कौरवो के पहले सेनापति थे, तथा उन्होंने युद्ध में पांडवो के सेना में खलबली मचा दी थी. महाभारत के युद्ध में एक समय पर ऐसा लगने लगा की पांडवो की सारी सेना एक ओर तथा भीष्म पितामाह एक ओर.

वासुदेव श्री कृष्ण की सहायता से ही पांडव भीष्म पितामाह पर विजय प्राप्त कर सके. परन्तु पांडवो के खिलाफ युद्ध में लड़ने के बावजूद भी भीष्म पितामाह का स्नेह पांडवो की तरफ था. अतः जब भीष्म पितामाह बाणों की शैय्या में लेटे थे तो उन्होंने अर्जुन को अपने पास बुलाया तथा जीवन से जुडी एक बहुत ही बड़ी सच्चाई से उन्हें परिचित करवाया.

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आइये जानते है की आखिर भीष्म ने कौन सी ऐसी बात बताई थी अर्जुन को जिसका ज्ञान सचमुच में बहुत अनमोल एवम कीमती है.

बाणों की शैय्या पर लेटे हुए जब भीष्म पितामह अपनी अंतिम क्षण का इन्तजार कर रहे थे उस समय उन्होंने अर्जुन को अपने पास बुलाया. तथा बोले वत्स, अपने पितामाह को थोड़ा पानी तो पिलाओ.

अर्जुन ने तुरन्त अपने तरकस से एक तीर निकाला तथा उसे अपने धनुष की सहायता से जमीन पर छोड़ दिया. उसी समय जमीन से जल की एक धारा निकली जो सीधे भीष्म पितामह के मुह गिरने लगी.

प्यास बुझने के बाद भीष्म अर्जुन से बोले की जीवन भी नदी की एक धारा की तरह ही है. व्यक्ति चाहे कितना भी प्रयास करे वह फिर भी नदी की धारा को मोड़ नहीं सकता तथा धारा अपने ही रास्ते जायेगी.

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