एक चमत्कारी महामंत्र जिसमे छुपा है हर समस्या का हल !

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चमत्कारी मन्त्र और उपाय chamatkari mantra aur upay :-

भगवान शिव की पूजा में कई प्रकार के मंत्रो को प्रयोग में लाया जाता है तथा हर प्रकार के कार्य सिद्धियों के लिए अलग अलग मंत्रो का प्रयोग किया जाता है परन्तु भगवान शिव के पूजन में प्रयोग किया जाने वाले सभी मंत्रो में एक विशेष मन्त्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है.

इस मन्त्र के जाप द्वारा महादेव शिव शीघ्र प्रसन्न होते है तथा अपने भक्तो पर कृपा बरसाते है. यह मन्त्र इतना प्रभावी है की इसके जाप मात्र से व्यक्ति अपनी हर प्रकार की समस्या को दूर कर सकता है तथा यह मन्त्र व्यक्ति को मोत के मुह से बाहर खीच लाता है.

आइये जानते है भगवान शिव के इस चमत्कारी महामन्त्र के बारे में…

महामृत्यंजय मन्त्र जाप mahamrityunjay jaap

शास्त्रो एवम पुराणों में आसाध्य रोगों से मुक्ति प्राप्ति तथा आकाल मृत्यु से बचने के लिए महामृत्युंजय मन्त्र का विशेष उल्लेख मिलता है. यह मन्त्र बहुत ही प्रभावी एवम सिद्ध माना जाता है, महान तपस्वी इस मंत्रो के द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न कर अपने कार्य सिद्ध करते थे.

इस महामंत्र को मृत संजीवनी के नाम से भी जाना जाता है, पुराणों में एक बहु चर्चित घटना के अनुसार जब देवताओ एवम असुरो के मध्य महासंग्राम हुआ था तब देवताओ ने अनेको असुरो को मोत के घाट  उतार दिया था व असुरो की सेना में खलबली मचा दी थी.

कुछ असुर देवताओ की नजरो से बचते हुए असुरो के गुरु शुक्राचार्य के पास पहुचे तथा उनको सारी घटना बतलाई. शुक्राचार्य ने महामृत्युंजय जाप के माध्यम से सभी असुरो को पुनः जीवित कर दिया .
महामृत्युंजय जाप को ही मृत संजीवनी के नाम से भी जाना जाता है.

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एक अन्य कथा के अनुसार मार्केंडेय ऋषि एवम उनकी पत्नी सन्तान विहीन होने के कारण दुखी रहते थे. एक दिन दोनों ही एक पर्वत के पास जाकर कठोर तपस्या में लीन हो गए. भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उनके सामने प्रकट हुए तथा उनसे वरदान मागने के लिए कहा.

दोनों ने अपनी इच्छा भगवान शिव के सामने जाहिर करि तथा पुत्रप्राप्ति  का वरदान मांगा. भगवान शिव की ने वरदान देते समय उनके सामने एक शर्ते रखी या तो वे वरदान में ऐसे पुत्र को मांग ले जिसकी आयु लम्बी हो परन्तु वह मंद बुद्धि हो अथवा उस पुत्र की कामना करे जो अल्प आयु होगा परन्तु उसकी बुद्धि तीव्र होगी.

ऋषि मार्केंडेय तथा उनकी पत्नी दोनों ने अल्प आयु परन्तु तीव्र बुद्धि वाले बालक को चुना. उस बालक की बचपन से ही भगवान शिव के प्रति श्रद्धा थी वह हर समय भगवान शिव की पूजा एवम तपस्या में लीन रहता था.

जब वह 16 वे साल में प्रवेश हुआ, तो वह बालक थोड़े चिंतित हुए और उन्होंने अपनी चिंता को अपने पिता मार्कण्डेय ऋषि को बताया.  मार्कण्डेय ने भगवान शंकर को खुश करने के लिए महामृत्युंजय का जाप किया तो भगवान शंकर शिवलिंग में से प्रकट हो गए. उन्होंने गुस्से से यमराज की तरफ देखा, तब यमराज ने डरकर बालक को न केवल बंधन मुक्त कर दिया, बल्कि अमर होने का वरदान भी दिया और प्रणाम करके चले गए.

महामृत्यंजय मन्त्र mahamrityunjay mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌.

इस प्रकार करे मृत्युंजय का जाप :

  • भय से छुटकारा प्राप्ति के लिए महामृत्युंजय जाप का 1100 बार जाप करना चाहिए .
  • रोगों से मुक्ति की प्राप्ति के लिए 11000 महामृत्युंजय का जाप करना चाहिए.
  • पुत्र की प्राप्ति के लिए, उन्नति के लिए, अकाल मृत्यु से बचने के लिए, सवा लाख की संख्या में महा मृत्युंजय का जाप करना चाहिए. यदि साधक पूरी श्रद्धा एवम विशवास के साथ महामृत्युंजय का जाप करे तो उसकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होगी.

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