एक चमत्कारी महामंत्र जिसमे छुपा है हर समस्या का हल ! chamatkari mantra in hindi

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कुछ असुर देवताओ की नजरो से बचते हुए असुरो के गुरु शुक्राचार्य के पास पहुचे तथा उनको सारी घटना बतलाई. शुक्राचार्य ने महामृत्युंजय जाप के माध्यम से सभी असुरो को पुनः जीवित कर दिया .
महामृत्युंजय जाप को ही मृत संजीवनी के नाम से भी जाना जाता है.

एक अन्य कथा के अनुसार मार्केंडेय ऋषि एवम उनकी पत्नी सन्तान विहीन होने के कारण दुखी रहते थे. एक दिन दोनों ही एक पर्वत के पास जाकर कठोर तपस्या में लीन हो गए. भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उनके सामने प्रकट हुए तथा उनसे वरदान मागने के लिए कहा.

दोनों ने अपनी इच्छा भगवान शिव के सामने जाहिर करि तथा पुत्रप्राप्ति  का वरदान मांगा. भगवान शिव की ने वरदान देते समय उनके सामने एक शर्ते रखी या तो वे वरदान में ऐसे पुत्र को मांग ले जिसकी आयु लम्बी हो परन्तु वह मंद बुद्धि हो अथवा उस पुत्र की कामना करे जो अल्प आयु होगा परन्तु उसकी बुद्धि तीव्र होगी.

ऋषि मार्केंडेय तथा उनकी पत्नी दोनों ने अल्प आयु परन्तु तीव्र बुद्धि वाले बालक को चुना. उस बालक की बचपन से ही भगवान शिव के प्रति श्रद्धा थी वह हर समय भगवान शिव की पूजा एवम तपस्या में लीन रहता था.

जब वह 16 वे साल में प्रवेश हुआ, तो वह बालक थोड़े चिंतित हुए और उन्होंने अपनी चिंता को अपने पिता मार्कण्डेय ऋषि को बताया.  मार्कण्डेय ने भगवान शंकर को खुश करने के लिए महामृत्युंजय का जाप किया तो भगवान शंकर शिवलिंग में से प्रकट हो गए. उन्होंने गुस्से से यमराज की तरफ देखा, तब यमराज ने डरकर बालक को न केवल बंधन मुक्त कर दिया, बल्कि अमर होने का वरदान भी दिया और प्रणाम करके चले गए.

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