आखिर क्यों बोलना पड़ा हनुमान जी को प्रभु श्री राम से झूठ, जाने क्या था वह झूठ व उससे जुड़ा राज !

पवन पुत्र हनुमान जी प्रभु श्री राम को अपना आराध्य मानते है. आपने अक्सर हनुमान जी एवम श्री राम जी की एक साथ वाली फोटो अथवा उनकी मूर्ति में देखा होगा की हनुमान जी सदैव श्री राम के चरणों में हाथ जोड़े बैठे रहते है.

परंतु आखिर हनुमान जी ने क्यों प्रभु श्री राम जी से झूठ बोला और वह कौन सा झूठ था और क्या था उसके पीछे का रहस्य. आइये जानते इस कथा को विस्तार से.

जब हनुमान जी रावण की लंका को जलाकर एवम माता सीता की चूडामणी रूपी सन्देश को लेकर वापस श्री राम के पास लोटे तो श्री राम के खेमे में उत्साह के लहर दौड़ पड़ी, भगवान श्री राम स्वयं हनुमान जी को वापस लौट देखकर बहुत प्रसन्न हुए.

श्री राम ने हनुमान जी कहा ! हे पवनपुत्र आपने मेरी प्राण प्रिय देवी जानकी का पता लगाकर मुझ पर जो उपकार किया ही वह वास्तव में मेरे लिए बहुत ही अनमोल है, में इसके लिए आपका कृतज्ञ हु.

तब हनुमान श्री राम जी से बोले हे प्रभु ! ये सब तो आपकी ही कृपा एवम आशीर्वाद के परिणाम स्वरूप हुआ है में तो आपके चरणों का एक दास हु.

श्री राम तब कुछ सोच कर पवन पुत्र हनुमान जी से बोले हे पवनपुत्र ! मुझे जामवंत जी बता रहे थे की आपने लंका जला दी हे, में यह जानना चाहता हु की क्या यह बात वास्तव में सत्य है ?

तब हनुमान जी श्री राम से बोले की नहीं लंका मेने नहीं जलाई है.




हनुमान जी की बात सुन श्री राम जी आश्चर्य में पड़ गए, तथा वे हनुमान जी से बोले हे पवनपुत्र ! आप मुझसे असत्य क्यों बोल रहे है.

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