दीपावली की पूजा विधि, लक्ष्मी पूजा विधि एवम गणेश पूजा विधि !

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deepavali ki puja vidhi 2016  दीपावली की पूजा विधि 2016 

दीपावली deepavali का पावन त्यौहार एक प्रतीक है धर्म की अधर्म पर विजय का. दीपावली हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारो में से एक है. दीपावली वाले दिन भगवान गणेश, माता लक्ष्मी एवम सरस्वती जी की पूजा की जाती है .

दीपावली deepavali के दिन इन तीनो देवी देवताओ की पूजा अर्चना की जाती है तथा धन, सुख-समृद्धि, शांति तथा सफलता प्राप्ति की मनोकामना मांगी जाती है.

आज हम आपको दीपावाली deepavali की पूजा विधि के बारे में बताएंगे जिनमे पूजा के दौरान कुछ विशेष बातो का आपको ध्यान रखना होगा.

दीपावली की पूजन विधि में प्रयुक्त समाग्री :- diwali pooja ki samagri in hindi

दीपावली deepavali के दिन पूजा के प्रयोग में लायी जाने वाली कई चीज़े वैसे तो घर में आसानी से मिल जाती है परन्तु फिर भी कुछ चीज़े आपको बाजार से खरीदने पड़ेगी जो निम्न प्रकार से है –

लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी तथा तांबे के दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत (जनेऊ), श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, देवताओं के प्रसाद हेतु मिष्ठान्न (बिना वर्क का) .

दिवाली की पूजा विधि :- diwali ki puja vidhi 

दीपावली deepavali की पूजा के दौरान सर्वप्रथम एक चौकी ले व सफेद वस्त्र चौकी के ऊपर बिछा ले अब भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी व सरस्वती की प्रतिमा अथवा तस्वीर उस चौकी के ऊपर विराजित करे.

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इसके बाद जलपात्र से थोड़ा सा जल लेकर उसे निम्न मन्त्र का जाप करते हुए प्रतिमा के ऊपर झिड़क दे. इसके बाद पूजा स्थान एवम अपने ऊपर छिडक जल छिडक कर अपने आप को पवित्र कर ले.

दिवाली पूजा मन्त्र :- diwali puja mantra

ऊँ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

इसके पश्चात पृथ्वी माता को प्रणाम करते हुए निम्न मन्त्र बोले तथा उनसे अपने गलतियों के लिए क्षमा मांगे.

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

दीपावली deepavali ध्यान एवम संकल्प विधि :-

पूजा के दौरान अपने मन एवम चित्त को शांत रखे, तथा पुरे श्रद्धा भाव से भगवान का ध्यान करे. इसके बाद हाथ में जल लेकर संकल्प करे साथ में पुष्प एवम अक्षत भी हाथ में ले ले. इसके बाद ध्यान करते हुए ऐसे संकल्प ले – अपना नाम, अपना स्थान, समय माता लक्ष्मी, सरस्वती एवम भगवान गणेश की पूजा करने जा रहा हु जिसका मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हो.

इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए. तत्पश्चात कलश पूजन करें फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए. हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए. इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है.

इन सभी के पूजन के बाद 16 मातृकाओं को गंध, अक्षत व पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करें. पूरी प्रक्रिया मौलि लेकर गणपति, माता लक्ष्मी व सरस्वती को अर्पण कर और स्वयं के हाथ पर भी बंधवा लें. अब सभी देवी-देवताओं के तिलक लगाकर स्वयं को भी तिलक लगवाएं. इसके बाद मां महालक्ष्मी की पूजा आरंभ करें.

दीपावली deepavali में माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्रीसूक्त, कनकधारा एवम लक्ष्मी सूक्त का पाठ करे :-

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सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करे ततपश्चात देवी लक्ष्मी की आरती करे. उनके समक्ष 7 , 11 अथवा 21 दीपक जलाये तथा माता को श्रृंगार अर्पित करे. श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त व कनकधारा का पाठ करे आपकी पूजा पूर्ण होगी.

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