माता चंद्रघंटा की पूजा विधि ! ( mata chandraghanta puja vidhi )

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माता चंद्रघंटा की पूजा विधि ! ( mata chandraghanta puja vidhi )

जब महिषासुर के साथ माता दुर्गा का युद्ध हो रहा था, तब माता ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था। इसलिए नवरात्रि के तृतीय दिन माता के इस चंद्रघण्‍टा mata chandraghanta रूप का पूजन किया जाता है। भारतीय धार्मिक मान्‍यतानुसार इनके पूजन से साधक के मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वत: प्राप्त होती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलतीहै।

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नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा की जिस तीसरी शक्ति पूजा-अर्चना की जाती है, उन दिव्य रुपधारी माता चंद्रघंटा की दस भुजाएं हैं। मां के इन दस हाथों में ढाल, तलवार, खड्ग, त्रिशूल, धनुष, चक्र, पाश, गदा और बाणों से भरा तरकश है।

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मां चन्द्रघण्टा  maa chandraghanta का मुखमण्डल शांत, सात्विक, सौम्य किंतु सूर्य के समान तेज वाला है। इनके मस्तक पर घण्टे के आकार का आधा चन्द्रमा भी सुशोभित है।

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