माता चंद्रघंटा की पूजा विधि ! ( mata chandraghanta puja vidhi )

mata chandraghanta puja vidhi, chandraghanta mata mantra, chandraghanta mata katha, chandraghanta mata aarti, chandraghanta devi story

चंद्रघंटा माता, चंद्रघंटा देवी मंत्र, माँ चन्द्रघंटा, मां चंद्रघंटा, चंद्रघंटा पूजा,mata chandraghanta puja vidhi, chandraghanta mata mantra

माता चंद्रघंटा की पूजा विधि ! ( mata chandraghanta puja vidhi )

जब महिषासुर के साथ माता दुर्गा का युद्ध हो रहा था, तब माता ने घंटे की टंकार से असुरों का नाश कर दिया था। इसलिए नवरात्रि के तृतीय दिन माता के इस चंद्रघण्‍टा mata chandraghanta रूप का पूजन किया जाता है। भारतीय धार्मिक मान्‍यतानुसार इनके पूजन से साधक के मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वत: प्राप्त होती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलतीहै।

नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा की जिस तीसरी शक्ति पूजा-अर्चना की जाती है, उन दिव्य रुपधारी माता चंद्रघंटा की दस भुजाएं हैं। मां के इन दस हाथों में ढाल, तलवार, खड्ग, त्रिशूल, धनुष, चक्र, पाश, गदा और बाणों से भरा तरकश है।

मां चन्द्रघण्टा  maa chandraghanta का मुखमण्डल शांत, सात्विक, सौम्य किंतु सूर्य के समान तेज वाला है। इनके मस्तक पर घण्टे के आकार का आधा चन्द्रमा भी सुशोभित है।

mata chandraghanta puja vidhi katha

मां चंद्रघंटा नाद की देवी हैं, इसलिए इनकी कृपा से साधक स्वर विज्ञान यानी गायन में प्रवीण होता है तथा मां चंद्रघंटा की जिस पर कृपा होती है, उसका स्वर इतना मधुर होता है कि उसकी आवाज सुनकर हर कोई उसकी तरफ आकर्षित हो जाता है। मान्‍यता ये भी है कि प्रेत बाधा जैसी समस्याओं से भी मां चंद्रघण्‍टा साधक की रक्षा करती हैं।

योग साधना की सफलता के लिए भी माता चन्द्रघंटा chandraghanta mata की उपासना बहुत ही असरदार होती है, इसलिए तंत्र-मंत्र व योग साधना के लिए नवरात्रि के तीसरे दिन का विशेष महत्‍व होता है। मां चंद्रघंटा की उपासना करने के लिए जिस मंत्र की साधना की जाती है, वो निम्‍नानुसार है:

पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते महयं चन्दघण्टेति विश्रुता।।

You May Also Like