vasant panchami puja 2017 hindi वसंत पंचमी पूजा 2017 हिंदी

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vasant panchami puja 2017 hindi वसंत पंचमी पूजा 2017 हिंदी 

वसंत पंचमी या श्रीपंचमी vasant panchami puja 2017 एक हिन्दू त्योहार है. इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है. इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं.
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था. जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और vasant panchami puja 2017 हर हिंदी तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं, वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था.
शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से vasant panchami puja 2017 इसका चित्रण मिलता है. देवी भागवत के अनुसार श्री कृष्ण ने सबसे पहले देवी सरस्वती की पूजा आरम्भ करि थी.
ऐसा माना जाता है की माघ मॉस के शुक्ल पक्ष की तिथि जिसे वसंत पंचमी vasant panchami puja 2017 के नाम से जाना जाता है के दिन विद्याआरम्भ के शुभ अवसर पर देवी सरस्वती की पूजा करनी चाहिए.

वसन्त पंचमी 2017 vasant panchami puja 2017

इस वर्ष वसंत पंचमी 01 फरवरी को मनाई जाएगी . vasant panchami puja 2017 इस दिन सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 34 मिनट तक है .

सरस्वती व्रत की विधि saraswati puja 2017

इस दिन मां सरस्वती की पूजा vasant panchami puja 2017 करनी चाहिए। प्रात: काल समस्त दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के पश्चात मां भगवती सरस्वती की आराधना का प्रण लेना चाहिए। इसके बाद दिन के समय यानि पूर्वाह्नकाल में स्नान आदि के बाद भगवान गणेश जी का ध्यान करना चाहिए।

 

स्कंद पुराण के अनुसार सफेद पुष्प, चन्दन, श्वेत वस्त्रादि से देवी सरस्वती जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के उपरांत देवी को दण्डवत प्रणाम करना चाहिए।

देवी सरस्वती का मंत्र saraswati mantra

सरस्वती जी की पूजा के लिए अष्टाक्षर मूल मंत्र “श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा” परम श्रेष्ठतम और उपयोगी है।
विशेष
देवी सरस्वती की पूजा में श्वेत वर्ण का अहम स्थान होता है। इनको चढ़ाने वाले नैवेद्य व वस्त्र अधिकतर श्वेत वर्ण के ही होने चाहिए।


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