श्री कृष्ण के बासुरी से जुडी कथा, कैसे मिली भगवान कृष्ण को बांसुरी | story of lord krishna in hindi

shri krishna story in hindi pdf story of lord krishna and radha in hindi story of lord krishna from birth to death in hindi krishna leela stories in hindi lord krishna in hindi wikipedia krishna birth story in hindi shri krishna death story in hindi lord krishna and sudama story in hindi

shri krishna story in hindi pdf, story of lord krishna and radha in hindi, story of lord krishna from birth to death in hindi, krishna leela stories in hindi, lord krishna in hindi wikipedia, krishna birth story in hindi, shri krishna death story in hindi, lord krishna and sudama story in hindi

story of lord krishna in hindi

shri krishna story in hindi pdf, story of lord krishna and radha in hindi, story of lord krishna from birth to death in hindi, krishna leela stories in hindi, lord krishna in hindi wikipedia, krishna birth story in hindi, shri krishna death story in hindi, lord krishna and sudama story in hindi

दोस्तों आज हम आपके साथ lord krishna की एक intresting story शेयर करने जा रहे. यह कहानी है भगवान श्री श्रीकृष्ण के हाथ में सदैव सोभायमान रहने वाली तथा मथुरावासियों के दिल को जितने वाली बासुरी.

द्वापरयुग के समय जब भगवान श्री कृष्ण ने धरती में जन्म लिया तब देवी-देवता वेश बदलकर समय-समय में उनसे मिलने धरती पर आने लगे. इस दौड़ में भगवान शिव कहा पीछे रहने वाले थे अपने प्रिय भगवान से मिलने के लिए वह भी धरती में आने के लिए उत्सुक हुए.

परन्तु वह यह सोच कर कुछ क्षण के लिए रुके की यदि वे श्री कृष्ण से मिलने जा रहे तो उन्हें कुछ गिफ्ट भी अपने साथ ले जाना चाहिए . अब वे यह सोच कर परेशान होने लगे की ऐसा कौन सा गिफ्ट ले जाना चाहिए जो भगवान कृष्ण को प्रिय भी लगे और वह हमेसा उनके साथ रहे.

story of lord krishna

तभी महादेव शिव को याद आया की उनके पास एक ऋषि दधीचि की महाशक्तिशाली हड्डी पड़ी है. ऋषि दधीचि वही महान ऋषि है जिन्होंने धर्म के लिए अपने शरीर को त्याग दिया था व अपनी शक्तिशाली शरीर की सभी हड्डिया दान कर दी थी. उन हड्डियों की सहायता से विश्कर्मा ने तीन धनुष पिनाक, गाण्डीव, शारंग तथा इंद्र के लिए व्रज का निर्माण किया था.

महादेव शिव ने उस हड्डी को घिसकर एक सुन्दर एवम मनोहर बासुरी का निर्माण किया. जब शिवजी भगवान श्रीकृष्ण से मिलने गोकुल पहुचे तो उन्होंने श्री कृष्ण को भेट स्वरूप वह बंसी प्रदान की तथा उन्हें आशीर्वाद दिया तभी से भगवान श्री कृष्ण उस बंसी को अपने पास रखते है .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *