एक अद्भुत मंत्र जो रग रग में भर देता है ताकत… खुद ही देखे चमत्कार

गायत्री मंत्र : ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।

वेद सबसे प्रारंभिक ग्रंथ हैं। अगर 2,500 से 3,500 वर्षों पीछे जाये तो गायत्री को सर्वोच्च मंत्र के रूप में कई बार उल्लेख किया गया है। भगवद गीता में, कृष्ण अर्जुन को कहते हैं, “मैं गायत्री हूं।”इसका मतलब है कि गायत्री को जप कर कृष्ण के सभी गुणों का अनुभव किया जा सकता है।

कई शताब्दियों के लिए, गायत्री मंत्र को गुरुओं और योगियों द्वारा इसकी शक्ति के कारण गुप्त रखा गया था। आज कई अन्य रहस्यों के साथ, प्राचीन प्रथाओं, का यह आश्चर्यजनक मंत्र सभी के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध हो गया है

गायत्री मंत्र का अर्थ: ऊं भूर्भुव: स्व: (दिव्य आत्मा जिसमें से हम सब आए)
तत्सवितुर्वरेण्यं (उसी शानदार प्रतिभाशाली प्रकाश को मुझ में जगाना)
भर्गो देवस्य धीमहि। (ताकि भीतर की चमक सभी विचारों और भावनाओं को खपत करे)
धियो यो न: प्रचोदयात् (शिक्षण और वास्तविकता को सफल बनाने के लिए मेरा मार्गदर्शन करना)

गायत्री मंत्र के चमत्कारी प्रभाव:
१) गायत्री मंत्र के उचारून से जीवन में बाधाओं का आना बंद होता है
२) जीवन के खतरो से बचाता है
३) आपका दिमाग को उज्ज्वल करता है
४) अज्ञानता को समाप्त करता हैं
५) संचार क्षमताओं में सुधार लाता हैं
६) अपने मानसिक दृष्टिकोण को बढाता है
७) ज्ञान को बढाता हैं
अंत में हम ये ही कह सकते हैं अगर आप नियम के साथ हरोज गायत्री मंत्र का उचारून करेगे तोह इसके चमत्कारी प्रभाव की अनुभूति आपको जरुर होगी

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