जाने एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाने चाहिए ?

why no rice on ekadashi?

ekadashi ke din chawal kyun nahi khaane chahiye,

दोस्तों क्या आप जानते हैं.एकादशी के दिन चावल क्यों नही खाने चाहिए? जबकि हिन्दू धर्म के हर छोटे-बड़े त्यौहार पर तिलक करते समय चावल का उपयोग किया जाता हैं.फिर एकादशी में ही चावल क्यों खाना माना हैं.

शास्त्रों में इससे जुडी कई कथा मिलती हैं.जैसे:-

एक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति इस दिन चावल या चावल से बनी कोई भी चीज का सेवन करता हैं.वह रेंगने वाले जीवो की योनि में जन्म लेता हैं.

कहते एक बार पार्वती माता महर्षि मेधा से इतना नाराज हुई थी.की महर्षि मेधा ने अपने प्राण त्याग दिया.और जिस भूमि पर उन्होंने अपने प्राण त्यागे.वहा से चावल उगने लगे.लेकिन बात सिर्फ यही ख़त्म नहीं होती.

शास्त्रों के अनुसार जिस दिन महर्षि मेधा ने अपने प्राण त्यागे उस दिन एकादशी थी.और माना जाता हैं.अगर हम एकादशी के दिन चावल खायेगे.तो इसका अर्थ महर्षि मेधा का मास खाने के सामान हैं.इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित हैं.

ekadashi ke din

आप जानते होंगे. चावल को अंकुरित करने के लिए.आज भी खाद या मिटटी की जरुरत नहीं पड़ती.क्योकि इसमें इतनी अधिक मात्रा में जल होता हैं.की इसे सिर्फ मुट्ठी भर जल से ही अंकुरित किया जा सकता हैं.लेकिन आपने कभी सोचा हैं. चन्द्रमा और चावल दोनों का संबंध जल से हैं.चन्द्रमा जल को अपनी तरफ आकृषित करता हैं.वही चावल की खेती में भी जल  का अधिक उपयोग होता हैं.

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मित्रो एकादशी का व्रत भगवान् विष्णु की पूजा के साथ-साथ,चंचल इन्द्रियों पर विजय होने और सांसारिक सुख का कम से कम भोग लेने के लिए भी किया जाता हैं.परन्तु इस दिन हम चावल का सेवन करेंगे. तो हमारी इन्द्रियों पर विजय होने की कामना को बल नहीं मिलेगा.क्योकि जल के सेवन से इन्द्रिया अधिक चंचल होती हैं.जो चावल में काफी मात्रा में होता हैं.इसलिए चावल एकादशी के दिन ना खाने की सलाह दी जाती हैं.

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