अगर आप दिल के मरीज हैं तो तुलसी का सेवन करने से पहले जान ले ये 3 बाते !

types of tulsi plant in hindi,

What is Tulsi leaf?-तुलसी की जानकारी

तुलसी लीफ (tulsi leaf) तुलसी के पौधे या तुलसी के पेड़ की पतियों को कहते हैं जो भारत में पिछले 5000 सालो से हर घर में इस्तेमाल हों रही हैं|
हमारी तुलसी की जानकारी यह कहती की तुलसी का पोधा लगभग 3-5 फुट लंबा होता है और इसकी पत्तिया 3 से 5 सेंटीमीटर लम्बी वा ताकतवर खुशबू वाली  होती है  तुलसी लीफ मन, शरीर और आत्मा के उपचारो के गुणों के लिए भारत समेत दुनिया के कई देशो में प्रशंसित है

What do we call Tulsi in English?

वैसे तो तुलसी को आमतौर पर तुलसी कह कर की सम्भोदित किया जाता हैं लेकिन अंग्रेजी भाषा में तुलसी को बेसिल लीव या फिर हौली बेसिल कहते हैं | यहाँ पर हौली बेसिल का अर्थ हैं पवित्र पौधा ऐसा इसलिए क्योंकी जैसे हम सबको पता हैं इसे पुरे भारत में भगवन की तरह पूजा जाता हैं. ये तो हों गयी इसकी अंग्रेजी नाम की बात लेकिन क्या आप जानते हैं इसके कई और भी नाम हैं जैसे वैज्ञानिक भाषा में इसे “ओसीमम सैंक्टम” कहते हैं
मलय भाषा में “डाउन तुलसी” कहते हैं
अरबिक भाषा में ” ‘ावरक तुलसी ” कहते हैं
इसके अलावा चीनी भाषा में Tulsi yè कहते हैं |

जैसे की मैंने आप को बताया की तुलसी की पत्तिया हमारे मन ,आत्मा और शरीर के उपचारो के लिए पूरी दुनिया में प्रचिलित हैं परन्तु अब मन में प्रसन आते हैं जैसे :
इसे कैसे लिया जाये ?(how to eat tulsi leaves ?)

कितनी मात्रा में लिया जाये ?(how much Tulsi should i take?)

क्या इसे सीधे खाया जा सकता हैं ?(Is it harmful to chew tulsi leaves ?) or ( Can we eat Tulsi leaves directly?)

और क्या सीधे खाने के कोई साइड इफ़ेक्ट तो नहीं ? (holy basil side effects dangerous)

दोस्तों इन सब प्रश्नो के उत्तर से पहले आपको तुलसी के प्रकार जानना जरुरी हैं |
तुलसी सामान्यतः दो किस्मों में पायी जाती है – हरी रंग की लक्ष्मी तुलसी और बैंगनी रंग की कृष्ण तुलसी

परन्तु कुछ जानकार कहते हैं की तुलसी  के 3 प्रकार होते  हैं  !

(types of tulsi in india)- (features of tulsi plant)-(types of tulsi plant in hindi)-( तुलसी के प्रकार)

 

कृष्णा तुलसी (जिसे श्यामा तुलसी या पर्पल लीफ तुलसी के नाम से भी जाना जाता है) – एक लौंग की तरह सुगंध और काली मिर्च जैसा स्वाद वा एक बैंगनी पोधा  हैं .

What is Rama Tulsi?राम तुलसी (ग्रीन लीफ तुलसी के रूप में भी जाना जाता है) – हल्के बैंगनी फूलों के साथ यह एक किस्म की हरी तुलसी हैं और जिसमे एक सुगन्धित लौंग की तरह खुशबू (यूजोनॉल के रासायनिक घटक के लिए धन्यवाद, जो लौंग में मुख्य सुगंध है) होती हैं और जिसका स्वाद मीठा होता हैं या आप कह सकते हैं taste of tulsi is sweet 

वाना तुलसी (या जंगली पत्ती तुलसी) – एक उज्ज्वल, हल्का हरी रंग की तुलसी का पौधा जो जंगली होती है और वह एशियाई और उत्तर / पूर्वी अफ्रीका के कई इलाकों में मिलती है; इसकी एक अधिक नीची सुगंध का स्वाद(taste of tulsi) होता है

अब बात करते हैं क्या इसे सीधे खाया जा सकता हैं ?

(Is it harmful to chew tulsi leaves ?) or ( Can we eat Tulsi leaves directly?)

लोकप्रिय धारणा के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु की पत्नी है, इस प्रकार तुलसी को चबाना अपमानजनक कार्य माना जाता है। हालांकि, यह विषय एक धार्मिक विचार है।

वनस्पति विज्ञानियों के अनुसार वैज्ञानिक रूप से देखा गया है, तुलसी में अधिकतम मात्रा में मुर्सुरी है इसलिए जब आप के अपने दांतों पर कच्चा मुर्सुरी लगेका , तो आपके दांत तुरंत गिरने लग सकते हैं हालांकि तुलसी के प्रभाव इतनी जल्दी नहीं होते लेकिन होते जरूर हैं|
लेकिन चिंता न करे आप इसे पानी में उबलने के बाद सीधा निगल भी सकते हैं जिससे मरकरी का आपके दांतों पर असर कम-से-कम होगा |

इसे कैसे लिया जाये ? (how to eat tulsi leaves ? or How to eat holy basil ? or Tulsi leaves )

आप तुलसी के पत्ते विभिन्न तरीकों से ले सकते हैं तुलसी के सूखे पत्ते से लेकर कच्चे पत्ते की शक्तिशाली चाय तक तुलसी को लेने के अनेक तरीके हैं पवित्र तुलसी की चाय शायद इस जड़ी-बूटि का सबसे आम और लोकप्रिय उपयोग है,और इसे सूखे पत्ती पाउडर के साथ भी बनाया जा सकता है।

(How do you make basil tea?) –आप उबलते कप के पानी में 2-3 चम्मच पाउडर डाले और इसे 5-6 मिनट तक उबलने दें। जिसे से स्वाद मजबूत होगा , और स्वास्थ्य पर प्रभाव ऐसा जिसे बेया नहीं किया जा सकता हैं!

तुलसी के नुकसान, (holy basil side effects dangerous)

जानकारों का मानना हैं की तुलसी और दूध के संयोजन से बचा जाना चाहिए। और तुलसी और गर्म शहद को भी एक साथ नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने पाया है कि तुलसी खाने और लगाने के लिए सुरक्षित है

ध्यान रखे एक यह जरुरी बात कि तुलसी रक्त के थक्के बन्ने की गति (means clot ) को धीमा कर सकते हैं, इसलिए तुलसी को हृदय की दवाइयों के साथ नहीं ले जाना चाहिए | जिससे बरुईसिंग और (ब्लीडिंग) रक्तस्राव की संभावना बढ़ सकती है। कुछ दवाएं जो धीमे रक्त के थक्के( clot) में शामिल होती हैं उनमें एस्पिरिन, क्लॉपिडोग्रेल, डाल्टेपीरिन, एनॉक्सपेरिन, हेपरिन, टिक्लोपीडाइन और वॉर्फरिन शामिल हैं। इसलिए हमारा सुझाव हैं अगर आप इन दवाओं का सेवन कर रहे हैं या आप को दिल की कोई भी बिमारी हैं तो तुलसी के पत्ते लेने से पहले कृपया अपने डोक्टर से जरुर पर्मरेश ले.

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