होली की पूजा विधि और व्रत 2018 | holi ki pooja vidhi aur vrat 2018

रंगो का त्यौहार होली राग रंग का त्यौहार हैं.रंगो के साथ इस त्यौहार में रागों का भी बड़ा महत्व हैं.शास्त्रीय संगीत ,लोक गीतों में, होली के अनेक गीतों का सौंदर्य देखते ही बनता हैं. राधा कृष्ण पर आधारित होली गीत होली के अवसर पर गाये जाते हैं. वैसे तो का त्यौहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं, पर मथुरा और ब्रज की होली देश ही नहीं विदेशो में भी लोकप्रिय हैं,ब्रज की लट्ठमार होली देखने विदेशो से भी लोग आते हैं.

होली पूजा विधि:
इस वर्ष होली 2 मार्च को मनाई जाएगी, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 1 मार्च को सायं 6:16 से रात्रि 8:47 तक हैं.भारतीय संस्कृति में होलिका दहन को ही होली की पूजा माना जाता हैं,यह पूजा शुभ मुहूर्त में हो तो अच्छा माना जाता हैं. होलिका दहन के लिए किसी चौराहे पर कंडो,लकड़ियों ,और सुखी घास से होलिका सजाई जाती हैं, और फूलो ,सुपारी,और पैसो से होलिका का पूजन किया जाता हैं.और जल को होलिका के पास छोड़ दिया जाता हैं. होलिका को अक्षत ,रोली चन्दन से उसकी पूजा की जाती हैं. इसके बाद होली की तीन बार परिक्रमा कर उसमे गेहू की बाली ,नारियल को भून कर उसका प्रसाद सभी को बांटा जाता हैं.होलिका दहन के बाद अक्षत और रोली अर्पित कर अर्घ्य दिया जाता हैं.और सात बार परिक्रमा की जाती हैं.

होली की पूजा और व्रत :  माताए अपने पुत्रो के कष्ट को दूर करने के लिए होली का व्रत और पूजा करती हैं.होली के व्रत का विशेष महत्व हैं, व्रत को खोलने के बाद महिलाये अपने घर की सुख समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं.माँ पुत्र को बुरी नजर से बचाने के लिए और उसकी मंगल कामना के लिए यह व्रत करती हैं. परिवार की सुख समृद्धि के लिए इस व्रत का विशेष महत्व हैं.

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