2018 की होली से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी | story of holi festival and when is holi 2018

फागुन की ऋतू  में जब प्रकृति भी अपना श्रृंगार रंग  बिरंगे फूलो से करती हैं, तभी रंगो का उत्सव फागुनोत्सव  मनाया जाता हैं. रंगो से सराबोर लोग ढोल बजाकर,गीत गाकर खुशिया बिखेरते हैं.फाल्गुन मास में मनाये जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं, होली के पर्व की शुरुवात बसंत पंचमी से शुरू हो जाती हैं, जब लोग गुलाल उड़ाकर इस त्यौहार की शुरुवात करते हैं. रंगो का ये पर्व आपसी बैर कटुता को भूल जाने का हैं, और फिर से एक होकर खुशिया मनाने का सन्देश देता हैं. होली को होलाक या होलिका भी कहा जाता हैं.

इतिहास के पन्नो पर दृष्टि डाले तो होली का त्यौहार आर्यो में भी प्रचलित था, इसके अलावा मुस्लिम कवियों ने भी अपनी रचनाओं में होली का वर्णन किया हैं. और यह भी वर्णित हैं की होली न केवल हिन्दू बल्कि मुसलमान भी मनाते हैं. अकबर जोधाबाई ,जहाँगीर और नूरजहाँ का होली खेलने का वर्णन मिलता हैं. इसके अलावा शाहजहाँ के समय में होली को ईद -ए गुलाबी या आब-ए-पाशी कहा जाता था. मध्ययुगीन काव्य साहित्य कृष्ण राधा की प्रचलित होली के वर्णन से भरा है.

होली कब मनाई जाती हैं :
फाल्गुनी या होलिका अथवा होली कहा जाने वाला रंगो का पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता हैं. यह पर्व कलुषित भावनाओ को होलिका की अग्नि में दहन करने का और फिर से एक हो जाने का सन्देश देता हैं.फाल्गुन मास हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का अंतिम मास हैं,इस वर्ष होलिका दहन 1 मार्च को ,और धुलंडी 2 मार्च को मनाई जाएगी.होली न केवल रंगो से बल्कि फूलो से भी खेलने का प्रचलन हैं. प्राचीन काल में होली फूलो से ही खेली जाती थी,पर अब आधुनिक समय में रंगो से खेलने का प्रचलन बढ़ गया हैं.

भक्त प्रह्लाद की याद में किया जाता हैं होलिका दहन:
भक्त प्रह्लाद की कहानी सर्वविदित हैं, नारायण की भक्ति से प्रह्लाद के पिता राक्षस हिरण्यकश्यप ने उसे अनेको बार मृत्यु दंड दिया ,लेकिन नारायण के आर्शीवाद से प्रह्लाद हर बार बच गया,प्रह्लाद की
एक बुआ थी,होलिका जिसे आग में नहीं जलने का वरदान प्राप्त था , होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गयी ,लेकिन भगवत कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गयी. इस प्रकार होली त्यौहार हैं ,बुराई रुपी होलिका को अग्नि में जला देने का .

होली सन्देश हैं राधा कृष्ण के अलौकिक प्रेम का :
होली का पर्व राधा कृष्ण की लीलाओ का एक प्रमुख हिस्सा हैं, होली के त्यौहार की बात करे तो मथुरा ,बरसाने की होली प्रसिद्द हैं. होली त्यौहार हैं विशुद्ध प्रेम का ,और अहंकार ,द्धेष को होली की अग्नि में जलाने का.

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