ब्रज की प्रसिद्ध लठ्ठमार होली का इतिहास | laththmar holi ka itihaas

 

होली का पावन पर्व राधा कृष्ण की होली के वर्णन के बिना अधूरा हैं. पूरे देश में होली की तैयारियां पूरे उल्लास के साथ शुरू हो चुकी हैं, पर मथुरा वृन्दावन और बरसाने की होली की छटा ही निराली हैं. भारत ही नहीं विदेशो से भी पर्यटक इस होली के आकर्षण को देखने आते हैं.मथुरा बरसाने की प्रसिद्ध होली लठ्ठमार होली हैं,जो राधा कृष्ण की लीलाओ को अभिव्यक्त करती हैं.और इसका वर्तमान स्वरुप उसी संस्कृति को दोहराये जाने जैसा हैं.

लठ्ठमार होली मनाने का दिन                                                                                                                       बरसाने की प्रसिद्ध लठ्ठमार होली शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती हैं.जिसमें पुरुष वर्ग नाचते गीत गाते होली मनाने जब जाते हैं ,तो हसीं ठिठोली करते हुए महिलाये उन पर लाठी से प्रहार करती हैं,और पुरुष ढालो से अपना बचाव करते हैं. आनंद और खुशियों के वातावरण के बीच यह लठ्ठमार होली का सौंदर्य देखते ही बनता हैं. यह विशेष लोकप्रिय लठ्ठमार होली बरसाने और नंदगाव के बीच खेली जाती हैं, पर अब यह लठ्ठमार होली ब्रज के हर एक गांव में अलग अलग दिन मनाई जाती हैं.

लठ्ठमार होली का इतिहास :

लठ्ठमार होली का इतिहास अगर हम देखे तो यह 16वी सदी में इस परंपरा का जनम हुआ माना जाता हैं. प्रसिद्ध साहित्यकार गोपाल प्रसाद व्यास ने अपनी रचनाओं में लठ्ठमार होली का जिक्र किया है.ब्रिटिश काल में मथुरा के गवर्नर रहे ग्राउस ने लठ्ठमार होली को कृतिम युद्ध लिखा हैं.

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