भैरव जयंती 2018: जानें शंकर के भयंकर रूप काल भैरव की कहानी

तंत्रशास्त्र के आराध्य काल भैरव(Bhairav Ashtami) शिव भगवान के ही एक रूप हैं. कापालिक संप्रदाय ( शैव(शिव) सम्प्रदाय को मानने वाला , जो मानव खोपड़ी के माध्यम से खाते पीते हैं.) के आराध्य देव काल भैरव (Bhairav Ashtami) हैं. भगवान भैरव शिव के गण माने जाते हैं शिव के क्रोध से ही भगवान भैरव का जन्म हुआ .

Bhairav Ka Swaroop भैरव का स्वरुप :

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शिव के अंश से काल भैरव की उत्पति हुयी. गहरे काले रंग के, काले रंग के वस्त्र धारण किये हुए ,अंगारकाय नेत्र ,काले कुत्ते की सवारी भैरव का ये स्वरुप हैं .भैरव तामस के देवता हैं , उन्हें बलि दी जाती हैं ,जहा बलि की प्रथा समाप्त हो गयी हैं, वहाँ एक साथ नारियल फोड़ने का रिवाज हैं.भैरव के 64 रूप हैं ये 64 रूप 8 भागो में विभक्त हैं.

पुराणों में ये कथा भी मौजूद हैं कि ब्रह्मा ने जब अपने पांचवे मुख से शिव का अपमान किया तभी शिव कि आज्ञा से भैरव कि उत्पत्ति हुयी, और भैरव ने अपने बाए हाथ के नाख़ून से ब्रह्मा जी का पांचवा सर नोच लिया. शिव ने भैरव को वरदान देते हुए कहा कि आपसे काल भी डरेगा.

 

Masik Kalashtami Vrat Importance  कालाष्टमी व्रत पूजा विधि

Bhairav Ashtami

कालाष्टमी का व्रत और पूजा हर माह के कृष्ण पक्ष कि अष्टमी तिथि (Bhairav Jayanti  Date 2018)को मनाया जाता हैं . इस महीने कालाष्टमी 8 अप्रैल( Kalashtmi ) को मनाई जाएगी. इस दिन भैरव की पूजा व्रत किया जाता हैं. इसे कालाष्टमी,भैरवाष्टमी भी कहा जाता हैं. काल भैरव का व्रत बहुत ही श्रेष्ठ माना गया हैं,और फलदायक भी.

इस दिन सुबह , दोपहर , संध्याकाल , और रात्रि (चारो पहर ) पूजा करनी चाहिए , रात्रि में शिव पार्वती की पूजा करनी चाहिए और कथा सुननी चाहिए . दिन में भैरव चालीसा ,भैरव के सहस्र नामो का जाप करना चाहिए .रात्रि में घंटा ,नगाड़ा , शंख बजाकर भैरव जी की आरती की चाहिए .इस दिन श्वान को भोजन कराना शुभ माना जाता हैं.

कालाष्टमी की कथा

एक बार ब्रह्मा , विष्णु के बीच श्रेष्ठा होने का विवाद उत्पन्न हुआ , समस्या समाधान के लिए सभी देवता शिव के पास गए और सर्व सहमति के आधार पर शिव को श्रेष्ठ माना गया . इस बात से ब्रह्मा नाराज हो गए और शिव का अपमान करने लगे , शिव को क्रोध आ गया उनके क्रोध से काल भैरव की उत्पति हुई.

 कालाष्टमी व्रत फल

कालाष्टमी (Masik Kalashtmi vrat vidhi importance)के दिन भैरव का व्रत पूरे विधि विधान से करने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.और उससे काल दूर हो जाता हैं., व्यक्ति रोग मुक्त हो जाता हैं, और उसे हर कार्य में सफलता मिलती हैं.

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