बुद्ध पूर्णिमा 2018 | जानिए 5 वो बातें, जो आपकी ज़िंदगी बदल देंगी !

वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा (Buddha purnima significance) बहुत ही पावन और महत्वपूर्ण दिनों में से एक हैं. बुद्ध पूर्णिमा इस दिन की महत्ता इसलिए भी ज्यादा हैं क्युकि इसी दिन महात्मा बुद्ध(Mahatma Buddha birth)  का जन्म भी हुआ था , इन्हे बोधिसत्व प्राप्त की प्राप्ति और इसी दिन महात्मा बुद्ध को महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था , महात्मा बुद्ध के जीवन के तीन महत्वपूर्ण बात एक ही तारीख में समयानुसार होती गयी.ऐसा संयोग किसी भी महापुरुष के साथ आज तक नहीं हुआ .

बुद्ध पूर्णिमा(Buddha purnima 2018) के दिन बोधगया में एक मास तक मेला चलता हैं जिसमे देश विदेश से लाखो बुद्ध अनुयायी आते हैं, बोधगया में जिस वृक्ष के नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुयी थी उस महाबोधि वृक्ष की जड़ो को दूध और पानी से सिंचित किया जाता हैं.

 

Buddha purnima significance

 

Buddha purnima samaroh and pooja vidhhi  बुद्ध पूर्णिमा के समारोह और पूजा विधि

बुद्ध पूर्णिमा बौद्धों के लिए एक बहुत बड़ा पर्व हैं , इस दिन कई समारोह आयोजित किये जाते हैं. हर देश में वहाँ की संस्कृति के अनुसार कार्यक्रम किये जाते हैं.

आज के दिन बौद्ध अनुयायी अपने घर को फूलो , दियो से सजाकर अलंकृत करते हैं.

बौधिसत्व वृक्ष के नीचे पूजा अर्चन करने का विशेष महत्व हैं . आज के दिन विश्व भर से बौद्ध अनुयायी बोधगया में एकत्रित होते हैं.

आज के दिन महात्मा बुद्ध की मूर्ति के समक्ष दीपक , अगरबत्ती जलाकर विशेष पूजा अर्चना का महत्व हैं, घरों में बौद्ध धर्म ग्रंथो का पाठ होता हैं.

बोधिसत्व वृक्ष की जड़ो में दूध और सुंगंधित द्रव युक्त पानी का छिरकाव किया जाता हैं , और वृक्ष के चारो और दिए जलाये जाते हैं. बोधिसत्व वृक्ष को रंग बिरंगी झालरों ,झंडो से सजाया जाता हैं, महात्मा बुद्ध के उपदेशो का अनुगमन किया जाता हैं.ऐसी मान्यता हैं की आज के दिन ही 531 ईसा पूर्व बुद्ध को बोधिसत्व वृक्ष के नीचे आत्मज्ञान प्राप्त हुआ था ,आज के दिन से ही वो तथागत बुद्ध कहलाये

इस दिन अच्छे और हितोपरक कार्य करना पुण्य माना जाता हैं. पक्षियों को आज के दिन पिंजरे से आजाद कर देना शुभ माना जाता हैं .

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