Famous temples in Delhi | दिल्ली के प्रसिद्द मंदिर

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दिल्ली न केवल अपनी मुगलकालीन कला से सम्बंधित बल्कि अपने प्राचीन मंदिरो और बेहतरीन शिल्पकला के लिए भी प्रसिद्द हैं(Famous temple in Delhi), यहाँ स्थापत्य कला , और बेहतरीन कारीगरी से सम्बंधित मंदिर स्थित हैं , जो विश्व में अपने बेहतरीन उत्कृष्ट कला के लिए प्रसिद्द हैं. आइये नजर डालते हैं इन मंदिरो के इतिहास और इनकी निर्माण कला शैली पर

 

भैरव मंदिर

प्रगति मैदान स्थित यह मंदिर प्राचीन मंदिरो में से एक हैं.यह मंदिर पांडव कालीन मदिर हैं पांडवो ने इसे स्थापित किया. इस मंदिर में भैरव के दो रूप हैं किलकारी भैरव और दूधिया भैरव , यह शायद भारत का एकमात्र मंदिर हैं जहा देवता को शराब चढ़ाई जाती हैं. पर इस मंदिर के आस पास ऐसी कोई दूकान नहीं हैं इस लिए जो भी भक्त भैरव जी को शराब अर्पित करता हैं उसे वह स्वयं ही लानी होती हैं, दूसरी और हैं दूधिया भैरव जिन्हे हम दूध अर्पित करते हैं.

अक्षरधाम मंदिर

अक्षरधाम मंदिर स्वामीनारायण की स्मृति में बना एक उत्कृष्ट कला का शानदार नमूना हैं ,अक्षरधाम का नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं, यह मंदिर 100 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ हैं. इस मंदिर में 234 गुम्बद , 20000 आचार्यो और अनुयायियों की मूर्ति स्थापित हैं. यहाँ मंदिर के आकर्षण का केंद्र नारायण सरोवर जिसमे 151 सरोवरों और नदियों का पानी हैं , जिसके पास हैं 108 गोमुख जो हिन्दू धर्म के 108 भगवानो का प्रतिनिधित्व करते हैं.इसके अलावा यहाँ गार्डन ऑफ़ इंडिया हैं जिसमे महापुरुषो और महिलाओ और देशभक्तो की मूर्तियाँ हैं.

 

 प्राचीन हनुमान मंदिर

दिल्ली के दिल में स्थित यह प्राचीन मंदिर हनुमान जी के बाल स्वरुप को दर्शाता हैं , इसमें हनुमान जी एक हाथ में खिलौना और दूसरे हाथ उनके सीने पर हैं , कहते हैं जब अकबर के वर्षो तक कोई संतान नहीं हुयी तब वह कनाट प्लेस स्थित इस मंदिर में आया और पुत्र प्राप्ति के लिए मुराद मांगी , और सलीम के रूप में उनकी मुराद पूरी हुयी ,अकबर ने प्रतीक के रूप में चाँद चढ़ाया जो आज भी व्यवस्थित हैं .

इस मंदिर की एक और ख़ास बात हैं वो यह की यहाँ 1 august 1964 से लगातार श्रीराम धुन (श्री राम जय राम जय जय राम )का जाप जारी हैं.जो गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं.हनुमान जी की कृपा अपने भक्तो पर सदा बरसती रहती हैं , यहाँ आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती हैं.

कहा जाता हैं जब तुलसीदास दिल्ली आये तो यहाँ आये और यही से उन्हें हनुमान चालीसा लिखने की प्रेरणा मिली , इस मंदिर में सोमवार,बुद्धवार और शुक्रवार को चोला चढ़ाने की ख़ास रिवाज हैं , भक्त चोले के साथ , इत्र की शीशी, सिन्दूर , चाँदी का वर्क अर्पित करते हैं, इस मंदिर की ख़ास विशेषता ये भी हैं की हर दस साल बाद हनुमान जी अपना चोला छोड़कर अपने प्राचीन स्वरुप में परिवर्तित होते हैं.

शीतला माता मंदिर

गुरुग्राम स्थित माता शीतला माता का मंदिर दिल्ली क्षेत्र का प्राचीन और भव्य मंदिर हैं. शीतला माता सक्रामक रोगो से बचाने वाली हिन्दू धर्म की प्रसिद्ध देवी हैं, गुरुग्राम स्थित शीतला माता का मंदिर महाभारतकालीन गुरु द्रोण की पत्नी कृपी से जुड़ा हुआ हैं, कहते हैं माता कृपी जब गुरु द्रोण के मरने के पश्च्यात सती होने का निश्च्य किया तो लोगो ने उन्हें बहुत मना किया, पर माता कृपी सोलह श्रृंगार कर सती होने के लिए तैयार हो गयी , तो उन्होंने कहा जो भी मेरे इस सती स्थल पर मुराद मानेगा उसकी मुराद अवश्य पूरी होंगी. आज उसी स्थान पर माता शीतला का प्रसिद्द मंदिर स्थित हैं.माता रानी अपने दरबार में आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी करती हैं .

झंडेवालान मंदिर

करोलबाग़ स्थित यह मंदिर मुगलकलन मंदिर हैं , मान्यता हैं, इस मंदिर में मुग़ल बादशाह शाहजहां ने प्रतीक रूप में झंडा चढ़ाया था जिस के आधार पर इसका नाम झंडेवालान पर गया .झंडेवालान मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित एक हिन्दू मंदिर था माता के भक्त बद्री प्रसाद को स्वप्न में दर्शन दिए और पहाड़ी स्थित अपनी मूर्ति के बारे में बताया , इसके बाद इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया .माता की मूल मूर्ति मंदिर के निचले स्तर पर हैं.

नवरात्रो और दुर्गा पूजा के दौरान यहाँ भक्त दर्शनार्थ हेतु आते हैं, और अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए माता के दरबार में मन्नते करते हैं. दुर्गा पूजा और नवरात्रो के दौरान यहाँ फूलो और प्रकाश मालाओ से मंदिर का विशेष सौंदर्यीकरण किया जाता हैं.

Lotus Temple/ लोटस टेम्पल

नेहरू प्लेस के पास स्थित यह मंदिर एक उपासना स्थल हैं, इस मंदिर में किसी भी देवी देवता की मूर्ति नहीं हैं, यहाँ हर धर्म के अनुयायी आते हैं, और प्रार्थना करते हैं, इस मंदिर की वास्तुकला बहुत ही बेहतरीन हैं , फरीबर्ज सहबा ने इस मंदिर का वास्तु तैयार किया , ध्यान और उपासना चिंतन मनन के लिए इस धार्मिक स्थल का वातावरण बहुत शान्त और अनुकूल हैं. इस मंदिर में 9 तालाब हैं, इस मंदिर को बनाने के लिए मार्बल ग्रीस से मगवाया गया.इस मंदिर में एक साथ 2400 लोग प्रवेश कर सकते हैं. देश और विदेश से हजारो की संख्या में पर्यटक यहाँ आते हैं.

 

बिरला मंदिर


काशी के प्राचीन मंदिरो की स्मृति को तरोताजा करता दिल्ली का यह मंदिर लाल पत्थरो और संगमरमर से निर्मित हैं .इस मंदिर को गौरी शंकर मंदिर के नाम से भी जाना जाता हैं .. देवी लक्ष्मी और नारायण इस मंदिर के प्रमुख देव हैं. महात्मा गांधी ने इसका उद्घाटन 1939 में इस शर्त पर किया की यहाँ सभी धर्म और जातियों का प्रवेश मान्य होगा.

पंडित विश्वनाथ शास्त्री के निर्देशन में इस मंदिर का निर्माण कार्य हुआ .इस मंदिर का क्षेत्र 7.5 में फैला हुआ हैं इस मंदिर में फुव्वारे और हरे उद्द्यान इस मंदिर के दर्शन के लिए देश विदेश से लोग आते हैं.दीपावली और जन्माष्टमी में यहाँ की रौनक देखने लायक होती हैं.

छत्तरपुर मंदिर

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दक्षिण भारतीय कला में निर्मित यह मंदिर . देवी दुर्गा का छठा रूप देवी कात्यायिनी को समर्पित यह मंदिर शिल्पकला का उत्कृष्ट संगम हैं. 70 एकड़ में फैला यह मंदिर 20 अन्य छोटे बड़े मंदिरो के साथ अपनी भव्यता दर्शाता हैं.इस मंदिर की कई विशेषता हैं,यहाँ देवी का श्रृंगार करने के लिए फूल प्रतिदिन दक्षिण भारत से मगवाये जाते हैं.

मंदिर में देवी कात्यायिनी की मूर्ति सोने से निर्मित हैं, जो सुन्दर और भव्य वस्त्रो के साथ विशेष अलंकृत आभूषणो से सजी रहती हैं इस मंदिर में प्रवेश करते ही इसके प्रागण में विशाल पेड़ हैं जिसमे लोग अपनी मन्नत मांगने के लिए मन्नत का धागा और चूड़िया बाँध देते हैं.

योगमाया का मंदिर

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कुतुबमीनार के नजदीक स्थित यह मंदिर महाभारतकालीन हैं , इस मंदिर का निर्माण पांडवो ने महाभारत के युद्ध के पश्च्यात कराया था .योगमाया भगवन कृष्णा की बहिन थी ,महमूद गजनवी और मुगलो ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था , बाद में राजपूतो के राजा हेमू ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था. दुर्गा पूजा और नवरात्र के दौरान इस मन्दिर में रौनक देखने लायक होती हैं नागर शैली में मंदिर की रचना की गयी हैं.

अयप्पा का मंदिर

अयप्पा का मंदिर हरिहर पुत्र को समर्पित हैं.यह मंदिर भगवान, गणेश , अयप्पा , और माता दुर्गा को समर्पित हैं, यहाँ स्थित भगवान् अयप्पा की मूर्ति पंचधातु से निर्मित हैं जो मूर्तिकार सदाशिव आचरी ने बनायीं हैं.

 

इस्कॉन मंदिर (राधा पार्थ सारथी मंदिर)

मशहूर वास्तुकार अच्युत कनविंडे ने इस्कॉन टेम्पल की वास्तुकला को डिजाइन किया हैं.राधा पार्थ सारथि मंदिर दिल्ली के भव्य मंदिरो में से एक हैं. राधा कृष्ण को समर्पित यह मंदिर देश के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक हैं.इस मंदिर में विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान , यहाँ राधा कृष्ण को प्रतिदिन छह प्रकार की आरतिया समर्पित,छह प्रकार के भोग , भगवान् को समर्पित किये जाते हैं.

कालकाजी मंदिर

नेहरू प्लेस के पास स्थित यह मंदिर बहुत प्राचीन और भव्य हैं इस मंदिर को मनोकामना सिद्ध पीठ भी कहा जाता हैं,बाबा बालकनाथ ने इस मंदिर को स्थापित किया. भक्त जो भी प्रार्थना यहाँ माँ को अर्पित करते हैं वह अवश्य पूर्ण होती हैं.मंदिर संगमरमर से निर्मित हैं और इस के चारो और पिरामिड के आकार के स्तम्भ हैं.इस मंडी में 12 मुख्य द्वार हैं जो 12 महीनो को दर्शाते हैं. नवरात्रियों और दुर्गा पूजा में यहाँ विशेष पूजा अर्चना होती हैं और देवी के दर्शनों के लिए भक्तो का मेला लगता हैं.

 

 

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