kailash mansarovar yatra , कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने से पहले जान ले ये प्रमुख बात

शिव शम्भू का पवित्र धाम माना जाने वाला कैलाश मानसरोवर (kailash mansarovar yatra ) शिव का पवित्र धाम हैं. कैलाश 22,028 फ़ीट ऊंचा पर्वत हैं ,जो साल भर बर्फ से ढका रहता हैं, कैलाश पर्वत स्वयंभू हैं , यह उतना ही प्राचीन हैं जितनी हमारी धरा हैं.कैलाश मानसरोवर(kailash mansarovar yatra ) पर प्रकाश और ध्वनि तरंगे मिलकर ॐ की ध्वनि पैदा करती हैं, जो अलौकिक हैं. कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम ,पूर्व भाग को क्रिस्टल ,पश्चिम भाग को रूबी और उत्तर भाग को स्वर्ण माना जाता हैं.कैलाश पर्वत सिर्फ पर्वत नहीं अपितु यह हैं भोले का धाम , भोले के भक्तो की श्रद्धा का केंद्र , मानसरोवर झील की खोज करने वाले राजा मान्धाता ने वर्षो तक मानसरोवर के किनारे तपस्या की. बौद्ध धर्मावलम्बियों का मानना हैं इसकी केंद्र में एक वृक्ष हैं जिसके फल सभी प्रकार के शारीरिक मानसिक रोगो को दूर करने में सक्षम हैं.

Kailash Mansarovar ke pramukh darshniya sthal

कैलाश मानसरोवर के प्रमुख दर्शनीय स्थल

यम द्वार : कैलाश मानसरोवर की यात्रा में आने वाला प्रथम दर्शनीय स्थल यम द्वार हैं ,मान्यता हैं यम द्वार के इस और संसार हैं दूसरी और मोक्षधाम ,यमद्वार को पार करने के पश्च्यात व्यक्ति को मृत्यु का भय नहीं रहता .

राक्षस झील: राक्षस झील को विश्व की खारे पानी की उच्चतम झील में से एक माना जाता हैं. इसका आकर चंद्र के सामान हैं.मान्यता हैं हैं राक्षस रावण ने यहाँ तपस्या की थी इसलिए इसे राक्षस ताल भी कहते हैं.

मानसरोवर झील: सूर्य के आकर वाली मानसरोवर झील स्वच्छ पानी की झीलों में से एक हैं. मान्यताओं के अनुसार मानसरोवर झील पुराणों में वर्णित क्षीर सागर हैं ,जिसमे भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी पूरे विश्व को संचालित करते हैं . मानसरोवर झील कैलाश पर्वत से ४० किलोमीटर दूर स्थित हैं.

गौरी कुंड :ल्हादू घाटी में स्थित 1 किलोमीटर की परिधि में बर्फ से आच्छादित गौरी कुंड झील स्थित हैं, इसकी आभा पन्ने के रंग जैसी हरी हैं,माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए यहाँ घोर तपस्या की , भक्त लोग बर्फ को हटाकर यहाँ स्नान करते हैं, जिससे देवी गौरी की कृपा उन्हें प्राप्त हो.

मानसरोवर झील और राक्षस झील : मानसरोवर और राक्षस झील सूर्य और चंद्र के बल को दर्शाती हुयी सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को प्रदर्शित करती हैं. दक्षिण की तरफ से इन्हे देखने पर स्वस्तिक का चिन्ह दिखाई देता हैं.

 

 Kailash Mansarovar Yatra  कैलाश मानसरोवर यात्रा

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कुछ विशेष बातो का ध्यान रखना पड़ता हैं जैसे बहुत ऊंचाई में होने के कारण यहाँ पर ऑक्सीजन की कमी होती जाती हैं जिससे साँस लेने में तकलीफ और सर दर्द आदि परेशानिया होती हैं. क्योकि एक नया वातावरण शरीर को प्रभावित करता हैं.

कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए तीन मार्ग हैं,
सड़क मार्ग: सड़क मार्ग के लिए सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित की जाती हैं. जिसमे चयनित व्यक्तियों का चयन मानसरोवर यात्रा के लिए किया जाता हैं.

वायु मार्ग: वायु मार्ग द्वारा भी कैलाश मानसरोवर की यात्रा की जाती हैं, वायु मार्ग से काठमांडू तक पहुँचकर वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा मानसरोवर झील तक जाया जा सकता है।

हेलीकॉप्टर की सुविधा : कैलाश तक जाने के लिए हेलिकॉप्टर की सुविधा भी मौजूद हैं । काठमांडू से नेपालगंज और नेपालगंज से सिमिकोट तक पहुँचकर, वहाँ से हिलसा तक हेलिकॉप्टर द्वारा जाया जा सकता हैं. मानसरोवर तक जाने के लिए लैंडक्रूजर का भी प्रयोग कर सकते हैं.

इस वर्ष कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए पंजीकरण शुरू हो गया हैं (21 फरवरी 2018) से शुरू हो गया हैं, जो 23 मार्च तक चलेगा.विदेश मंत्रालय द्वारा इस वर्ष यात्रा के लिए उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के अलावा सिक्कम के नाथुला दर्रे से भी यात्रा आयोजित की जाएगी. सिक्किम के नाथुला दर्रे से यात्रा मात्र 5 दिन में पूरी हो जाएगी,जिसमे पर व्यक्ति 2 लाख (अनुमानित) का खर्चा आएगा, चीन द्वारा नाथुला दर्रे के इस्तेमाल की इजाजत देना भारत के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत हैं . इस वर्ष यह यात्रा 8 जून से शुरू होकर 8 सितम्बर तक समाप्त होगी .इसमें तीर्थयात्री की उम्र 18 वर्ष से लेकर अधिक से अधिक 70 वर्ष तक होनी चाहिए.

 

 

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