कामदा एकादशी: जानें एकादशी व्रत की तिथि व पूजा विधि

Ekadashi एकादशी

हिन्दू पंचांग के अनुसार हर मास की ग्यारहवीं(kamada ekadashi) तिथि को एकादशी कहते हैं. मास में दो बार एकादशी आती हैं, कृष्ण पक्ष की और शुक्ल पक्ष की , दूसरे शब्दों में कहे तो हर अमावस्या और पूर्णिमा के बाद आने वाली तिथि एकादशी कहलाती हैं.एकादशी हिन्दू तिथियों में बहुत ही पावन और पुण्यफलदायी तिथि मानी जाती हैं,वर्तमान समय में यज्ञ आदि करना इतना सरल और सहज नहीं हैं, इसलिए एकादशी(ekadashi vrat) का व्रत करके जो पुण्य फल सहज ही प्राप्त किया जा सकता हैं, वो किसी और कार्य द्वारा इतना सरल नहीं.

Kamada Ekadashi कामदा एकादशी

कामदा एकादशी बहुत पुण्य फलदायी एकादशी मानी जाती हैं, इस एकादशी में इतनी शक्ति और सामर्थ्य हैं कि प्रेत, पिशाच आदि योनियों से जो मुक्त करा दे, कामदा एकादशी को करने से धार्मिक वैदिक यज्ञो का फल मिलता हैं, एकादशी का महात्मय इतना हैं यदि आप तीर्थयात्रा, दान, पुण्य, नहीं कर सकते हैं, तो कामदा एकादशी का व्रत करके सारे पुण्यदायक फल अर्जित कर सकते हैं, यह एकादशी सारे पुण्यो का फल देने वाली होती हैं इसलिए इसे फलदा एकादशी भी कहते हैं.

 Falda Ekadashi vrat katha फलदा एकादशी व्रत कथा

फलदा एकादशी अर्थात कामदा एकादशी हिन्दू नव संवत्सर (विक्रम सम्वत ) की पहली एकादशी भी मानी जाती हैं , इसलिए इसका विशेष महत्व हैं. आगे जानते हैं फलदा एकादशी, कामदा एकादशी की कथा:(kamada ekadashi vrat katha)

युद्धिष्ठर के विशेष आग्रह करने पर भगवान् कृष्ण ने कहा हे पाण्डुपुत्र यह कथा महर्षि वशिष्ठ ने राजा दलीप को सुनाई थी वही कथा का महात्मय आज में तुम्हे बताने जा रहा हूँ ,इस कथा को ध्यान ,श्रद्धा और ह्रदय में धारण करते हुए सुनो , यह कथा ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त करेंगी , और धार्मिक वैदिक आदि यज्ञो का का पुण्य फल तुम्हे प्रदान करेगी. कथा इस प्रकार से हैं.

बहुत ही संपन्न नगर था रतनपुर नाम का , वहाँ की सुख , समृद्धि , ऐश्वर्य, देवलोक के सदृश था , पुण्डरीक नाम का नरेश वहाँ का वैभव संपन्न राजा था. उस नगर में यक्ष ,गधर्व, अप्सराये निवास करती थी.यही पर ललित और ललिता नाम के पति पत्नी निवास करते थे, जिनका एक दूसरे के प्रति अथाह और गहन प्रेम था , एक बार राजा पुण्डरीक के महल में किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन था

जिसमे ललित गंधर्व भी गायन वर्ग के साथ अपनी प्रस्तुति दे रहा था , अचानक गाते गाते उसे अपनी पत्नी का स्मरण हो आया, और वह अपने सुर से भ्रमित हो गया , उसकी इस गलती को कर्कोट नाग ने देख लिया , और उसके पीछे छुपी वजह उस गंधर्व का पत्नी प्रेम जानकर उसने राजा पुण्डरीक को बता दिया , क्रोधवश रहा पुण्डरीक ने गन्धर्व ललित को राक्षस बन जाने का श्राप दे दिया.

राक्षस बन जाने के कारण उसकी दयनीय स्थिति को देखकर उसकी पत्नी ललिता, मुनि श्रृंगी के आश्रम में पहुंची और सब कुछ विस्तार से बताया, मुनि ने अपने ज्ञान से ललिता को कामदा एकादशी के बारे में बताया और कहा की यदि वह इस व्रत को कर इसका पुण्य फल अपनी पति गन्धर्व ललित को दे देगी तो ,वह इस राक्षस योनि से मुक्त हो जायेगा, ललिता ने कामदा एकादशी का व्रत किया और इसका सारा पुण्य और संचित फल अपने पति गन्धर्व ललित को दे दिया तो गन्धर्व राक्षस योनि से मुक्त हुआ,और उसे पुन: अपनी देह प्राप्त हुयी.

और यह कामदा एकादशी के व्रत का पुण्य प्रभाव ही था, की दोनों गंधर्व विमान में बैठकर स्वर्गलोक में रहने लगे .

 

Kamada ekadashi 2018 tithi aur muhurt

एकादशी तिथि प्रारम्भ :03:43  बजे (27 मार्च 2018)
एकादशी तिथि समाप्त: 01:39 बजे (28 मार्च 2018)

Kamada pooja aur vrat vidhi  कामदा पूजा और व्रत विधि

कामदा एकादशी के दिन प्रातकाल उठकर स्नान आदि कारक स्वच्छ वस्त्र पहनकर विष्णु भगवन की पूजा करनी चाहिए .विष्णु के समक्ष , फल, फूल, धुप,अगरबत्ती , घी का दीपक रखकर पूजा करे और विष्णु एकादशी की पूजा के साथ कामदा एकादशी की व्रत कथा पढ़े.

फलदा एकादशी या कामदा एकादशी के दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व हैं, इस दिन गरीबो को दान देकर , भोजन करवाकर , ही स्वयं अन्न ग्रहण करना चाहिए ,तभी इस व्रत की सार्थकता सिद्ध हो पाती हैं.

kamada ekadashi

 

Kamada ekadashi date in 2018 कामदा एकादशी

इस वर्ष कामदा एकादशी या फलदा एकादशी इंग्लिश केलिन्डर के हिसाब से 27 मार्च 2018 को मनाई जाएगी. वैसे एकादशी का व्रत हर शुक्ल या कृष्ण पक्ष की ग्याहरवी तिथि को मनाया जाता हैं.

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2018 Papmochani Ekadashi Vrat Aur Puja Vidhi

 

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