Rameshwaram Mandir History/रामेश्वर मंदिर का इतिहास

भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग(Rameshwaram Mandir,) ,कला और स्थापत्य का बेजोड़ संगम हैं, दक्षिण भारत के रामेश्वरम में स्थित शिव का यह ज्योतिर्लिंग बहुत ही पावन और वैष्णव और शैव का बेजोड़ नमूना हैं. रामेश्वर अर्थात राम के ईश्वर. इसी के नाम पर यह स्थान रामेश्वर कहलाया . पुराणों में रामेश्वरम को गंधमादन कहते हैं. गंधमादन, रामेश्वरम से डेढ मील दूर एक पहाड़ी हैं, मान्यता हैं इसी पर चढ़कर हनुमान जी ने लंका के लिए उड़ान भरी थी.

रामेश्वरम मंदिर का इतिहास

रावण को मारने के बाद राम ने इसी स्थान पर ब्रह्महत्या(Rameshwaram Mandir history)का प्रायश्चित्त किया था , और उन्होंने यहाँ शिवलिंग की स्थापना के लिए हनुमान जी को हिमालय से शिवलिंग लाने के लिए भेजा, किन्तु हनुमान जी को आने में देर हो रही थी और मुहूर्त बीत रहा था तो माँ सीता ने रेत से शिवलिंग का निर्माण कर दिया , तब श्री राम ने शिवलिंग की स्थापना कर इसकी पूजा कर दी, और इस शिवलिंग का नाम हुआ रामनाथ , तब हनुमान जी भी शिवलिंग ले आये, प्रभु राम ने उसी शिवलिंग के साथ ही इस शिवलिंग को ही स्थापित कर दिया उसे विश्वनाथ नाम दिया ,गर्भ गृह में ये दोनों शिवलिंग स्थित हैं.

रामेश्वर मंदिर की स्थापत्य कला

रामेश्वरम मन्दिर के गर्भगृह का निर्माण 12वी सदी में श्री लंका के राजा पराक्रमबाहु ने इसका निर्माण शुरू किया.15 एकड़ में फैला रामेश्वरम मंदिर का गलियारा विश्व का सबसे बड़ा गलियारा हैं. प्रवेश द्वार पर स्थित द्वार 30 – 40 फ़ीट ऊंचे हैं. यहाँ का गलियारा 4000 फ़ीट लम्बा हैं. इसके अलावा मदिर में स्थित खम्बे जिन पर कारीगरी का जो उत्कृष्ट नमूना हैं वो शायद ही कही देखने को मिले जो कलाकृतिया एक खम्बे में उकेरी गयी हैं , वो दूसरे खम्बे में नहीं , यहाँ की स्थापत्य कला का अनूठा संगम देखने के लिए विश्व से लोग आते हैं.

 

मंदिर में जाने का समय

रामेश्वर मंदिर में जाने का समय दर्शन और पूजा आदि का समय निश्चित हैं,(Rameshwaram Temple Timings)

प्रात: काल दर्शन का समय : 5 am -1 pm
सायं काल दर्शन का समय : 3 pm – 9 pm

पूजा का समय

पल्लियारै दीपा आराधना – 5 am
स्पटिका लिंगा पूजा – 5 :10 am
थिरुवनन्थल पूजा – 6 :00 am
विला पूजा – 7 : 00 am
कालसांठी पूजा – 10 :00 am
ऊंची कला पूजा – 12 :00 pm
अर्थजामा पूजा- 8 :30 pm
पल्लियारै पूजा – 8 :45 pm

Madurai to Rameshwaram

मदुरई से रामेश्वरम की दूरी 176 km हैं. (Madurai to Rameshwaram)इस दूरी को तय करने में 3 घंटे 20 मिनट का समय लगता हैं. मदुरई से रामेश्वरम तक ट्रेन से दूरी 161 किलोमीटर हैं.आप बस ट्रेन या टैक्सी किसी भी माध्यम से आसानी से रामेश्वरम पहुंच सकते हैं.

Rameshwaram Temple Dress Code :

रामेश्वरम मंदिर में पूजा , वस्त्र पहनने को लेकर कुछ नियम हैं,(भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग(Rameshwaram Mandir Dress Code) ,कला और स्थापत्य का बेजोड़ संगम हैं, दक्षिण भारत के रामेश्वरम में स्थित शिव का यह ज्योतिर्लिंग बहुत ही पावन और वैष्णव और शैव का बेजोड़ नमूना हैं आप वह जीन्स , शर्ट पहनकर मंदिर के भीतर नहीं जा सकते ,यह जरुरी हैं की आप वह जाने से पूर्व आप मंदिर के नियमो को भली भाति जान ले .जिनमे पुरुषो के लिए धोती कुर्ता या कॉटन के पैंट शर्ट ही मान्य हैं. महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार कुर्ता मान्य हैं. बिना दुपट्टे के अंदर जाना प्रतिबंधित हैं.

Dhanushkoti


धनुष कोटि(Dhanushkoti) रामेश्वरम के दक्षिणी छोर पर स्थित एक छोटा सा शहर हैं, यह शहर भारत को श्रीलंका से जोड़ता हैं. मान्यता हैं  राम लंका पर विजय के उपरांत लौटे थे , तो विभीषण ने उनसे इस पूल (राम सेतु) को तोड़ने के लिए आग्रह किया प्रभु राम ने धनुष के एक छोर से सेतु को तोड़ दिया तभी से यह स्थान धनुष्कोटि कहलाया जाने लगा . इस स्थान की मान्यता इतनी हैं की काशी की यात्रा को यहाँ से जोड़ा जाता हैं , धनुष्कोटि में स्नान करने और रामेश्वरम में पूजा करके ही काशी की यात्रा पूर्ण मानी जाएगी.

List of Temples in Rameshwaram

रामेश्वरम मंदिर अपने बेजोड़ कारीगरी के लिए विश्व प्रसिद्द हैं,रामेश्वरम में इसके अलावा बहुत से ऐसे प्रसिद्द मंदिर हैं जो अपने पौराणिक मान्यताओं , अदभूत शिल्प कला के लिए प्रसिद्द हैं. जिनमे कुछ प्रमुख मंदिर हैं:

Sri Ramanathaswamy Temple


चार धामों में से एक रामेश्वर ज्योतिलिंग की मान्यता , काशी के विश्वनाथ मंदिर के समान हैं , ऐसी मान्यता हैं शिव को समर्पित यह ज्योतिर्लिंग मंदिर का निर्माण 12 वी सदी में हुआ था यह मंदिर अपनी स्थापत्य और बेहतरीन कारीगरी के लिए प्रसिद्द हैं.

The five faced Hanuman


पांच मुँह वाले हनुमान जी का मंदिर रामेश्वरम का आकर्षण का केंद्र बिंदु हैं,पौराणिक मान्यताओं में पांच मुँह वाले हनुमान जी के मन्दिर का वर्णन हैं. हनुमान जी के अलावा यहाँ प्रभु राम , लक्ष्मण , माँ सीता की मुर्तिया भी हैं और सभी की पूजा अर्चना की जाती हैं.

Kodandaramar Temple


कोदंडारमर मंदिर भी रामेश्वरम के प्रमुख मंदिरो में से एक हैं, इस मंदिर में राम , लक्ष्मण , सीता,हनुमान जी के साथ विभीषण की भी पूजा की जाती हैं. इस मंदिर से जुडी एक ख़ास बात यह भी हैं की धनुष्कोटि में आये 1964 भयानक और भीषण चक्रवात में यह मंदिर सुरक्षित रहा .

Nambu Nayaki Amman Temple


दक्षिणा काली को समर्पित यह मंदिर रामेश्वरम का एक अन्य मंदिर हैं, अच्छे स्वस्थ के लिए यहाँ इस देवी की पूजा की जाती हैं,यह देवी नाम्बु नायकी इस क्षेत्र की रक्षा करती हैं,लोकमत हैं देवी बहुत अधिक शक्तिशाली और भक्तो द्वारा प्रार्थना किये जाने पर लोगो की समस्याएं दूर करती हैं, इस देवी की मान्यता इसलिए अधिक हैं.

 

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जाने रामेश्वरम मंदिर और इस के इतिहास के बारे में

 

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