Jaaniye Aakhir Kya Hai Surya Dev ke Rath Ki Visheshta

भगवान का नेत्र कहा जाने वाले सूर्य भगवान इस धरती पर साक्षात् देवता हैं, सूर्य देव(Surya Dev Ka Rath) से ही इस धरा पर जीवन संभव हैं , सूर्य इस चराचर जगत की आत्मा हैं .कश्यप और अदिति की संतान के रूप में प्रसिद्द सूर्य देव को आदित्य के रूप में भी जाना जाता हैं, सूर्य देव के 11 अन्य भाई हैं जिनके समूह को आदित्य कहा जाता हैं, सूर्य देव के 11 भाई के नाम हैं (अंश, आर्यमान, भाग, दक्ष, धात्री, मित्र, पुशण, सवित्र, सूर्या, वरुण, वमन, ) पुराणों में अदिति और कश्यप की 9 सन्तानो का उल्लेख हैं ,लेकिन बाद में कही पर यह संख्या 12 बताई गयी हैं, सूर्य देव और उनके भाई मिलकर वर्ष के 12 महीनो को दर्शाते हैं.

शनि और यम देव जो मनुष्यो के न्यायकारी देवता हैं, .सूर्य देव( Surya Dev Ka Rath ) की ही संताने हैं. जहा शनि देव मनुष्यो को उनके कर्मो अनुसार न्याय देते ,वही यम मृत्यु के बाद हमें हमारे कर्मो के अनुसार हमें दंड देते हैं.,यमुना ,अश्विनी,तप्ति,वैवस्वत मनु सभी भगवन सूर्य की संताने हैं.वैवस्वत मनु ही मानव जाति के पहले पूर्वज हैं हम सभी मनु की संताने हैं,

Surya Dev Ka Rath सूर्य देव का रथ

सूर्य देव के रथ का विस्तार नौ हजार योजन हैं ,इसका धुरा ( अक्ष ,केंद्र) डेढ़ करोड़ सात लाख योजन लम्बा हैं. सूर्य देव का रथ भी रहस्यपूर्ण हैं इतने बड़े रथ में 1 पहिया आखिर क्यों हैं,ये 1 पहिया 1 वर्ष को दर्शाता हैं, जिसका नाम संवत्सर हैं,जिनमे ऋतुएँ और बारह महीने स्थित हैं इस 1 पहिये में 12 तिल्लिया लगी हुयी हैं जो वर्ष के 12 महीनो को दर्शाती हैं और इसी के आधार पर ऋतुओ को भी बांटा गया हैं

सूर्य देव के रथ के सारथी अरुण हैं, जो सूर्य के रथ की कमान को अपने हाथो में लेते हैं,लेकिन रथ चलते हुए अरुण सूर्य की और मुँह करके ही बैठते हैं.सूर्य की गति निरंतर हैं ,चलायमान हैं.

Saat  Ashwo Ki Manyata सात अश्वो की मान्यता

सूर्य देव के रथ में लगे 7 अश्व भी रहस्यों के प्रतीक हैं, आखिरकार 7 अश्वो का क्या अर्थ हैं अश्वो की संख्या 7 से कम या ज्यादा भी तो हो सकती हैं.सूर्य देव द्वारा ७ अश्वो का चुनाव भी बहुत रहस्यपूर्ण है  रथ में लगे 7अश्व 7 दिनों के प्रतीक हैं , ये 7 अश्व (गायत्री, भ्राति, उस्निक, जगति, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति) हैं.

Surya Dev Ka Rath

पौराणिक मान्यता के अनुसार 7 अश्व 7 दिनों को दर्शाते हैं , पर मान्यता के विपरीत जाकर भी हम साधारण दृष्टि से अवलोकन करे तो देखेंगे तो सूर्य से निकलने वाली रश्मिया भी 7 होती हैं ,तो ये 7 घोड़े 7 रश्मियों का प्रतीक भी हैं,यह रौशनी स्वयं सूर्य देव से ही उत्पन्न होती हैं..सूर्य देव के रथ के ये 7 अश्व भी असाधरण हैं,प्रत्येक घोड़ा जहा रंग में एक दूसरे से भिन्न हैं जो इंद्रधनुष के 7 रंगो को इंगित करता हैं .

यदि सूर्य देव के रथ का अवलोकन किया जाये तो पौराणिक आधार पर भी और वैज्ञानिक तथ्यों पर केंद्रित हैं सूर्यदेव का रथ|

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